बाबा निशिहरनाथ मंदिर को विकास की जरूरत

Published at :05 Jan 2016 6:37 PM (IST)
विज्ञापन
बाबा निशिहरनाथ मंदिर को विकास की जरूरत

बाबा निशिहरनाथ मंदिर को विकास की जरूरत — छह नंबर पेज की लीड — फोटो – मधेपुरा 12कैप्शन – बाबा निशिहरनाथ मंदिर — स्थानीय मान्यता के अनुसार बाबा सिंहेश्वर नाथ से भी प्राचीन है निशिहरनाथ लिंग — — मंदिर की ख्याति रहने के बावजूद परिसर में मूलभूत सुविधाओं का भी है अभाव — — स्थानीय […]

विज्ञापन

बाबा निशिहरनाथ मंदिर को विकास की जरूरत — छह नंबर पेज की लीड — फोटो – मधेपुरा 12कैप्शन – बाबा निशिहरनाथ मंदिर — स्थानीय मान्यता के अनुसार बाबा सिंहेश्वर नाथ से भी प्राचीन है निशिहरनाथ लिंग — — मंदिर की ख्याति रहने के बावजूद परिसर में मूलभूत सुविधाओं का भी है अभाव — — स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनदेखी से ग्रामीण और श्रद्धालु खिन्न — प्रतिनिधि शंकरपुर, मधेपुरा. प्रखंड क्षेत्र के निशिहरपुर में स्थित प्राचीन बाबा निशिहरनाथ मंदिर प्रशासनिक उदासीनता के कारण उपेक्षित है. जबकि निशिहरपुर मंदिर का गौरवान्वित इतिहास रहा है. शंकरपुर सहित सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए निशिहरपुर महादेव आस्था के केंद्र रहे है. वर्तमान समय में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के अभाव से गुजरना पड़ रहा है. न प्रशासन और न जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान दे रहे है. — सैकड़ों वर्ष पूर्व हुआ था निर्माण — बाबा निशिहर नाथ मंदिर का निर्माण सैकड़ों वर्ष पूर्व हुआ था. उस समय यह पूरा क्षेत्र जंगल से भरा था. कहते हैं शृंगि ऋषि इस पूरे वन में तप किया करते थे. उस वक्त से ही बाबा निशिहर नाथ का पूजन किया जाता है. — ग्रामीण स्तर पर होती है देखभाल — वर्तमान में इस मंदिर का देखभाल ग्रामीण स्तर पर ही किया जाता है. ग्रामीणों के सहयोग से ही यहां कई अन्य मंदिरों का निर्माण भी कराया गया है. मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाये गये चढ़ावा का हिसाब किताब भी ग्रामीण ही रखते हैं. — लगता है शिव रात्रि मेला — फाल्गुन माह में लगने वाले महाशिव रात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है. लेकिन मेले की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं की जाती है. जबकि इस दिन यहां हजारों श्रद्घालू पहुंचकर भेालेनाथ का जलाभिषेक करते है. — निगरानी कमेटी का हो गठन — ग्रामीण कहते है कि मंदिर के विकास के लिए यहां निगरानी समिति की आवश्यकता है. नवीन कुमार सिंह, किशोर कुमार सिंह, मुंशी , सोनू, बबलू मनोज सहित अन्य ग्रामीण मंदिर को बाबा सिंहेश्वर नाथ से भी प्राचीन बताते है. हालांकि इसका प्रमाणिक दस्तावेज नहीं है. लेकिन इस क्षेत्र में यह मान्यता चली आ रही है. ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासन की देख रेख में एक निगरानी समिति का गठन किया जाना चाहिए. ताकि मंदिर का विकास कर क्षेत्र के लोगों की आस्था का रक्षण किया जा सके.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन