सुकून की जिंदगी पर टावरों का पहरा

सुकून की जिंदगी पर टावरों का पहरा फोटो – मधेपुरा 08कैप्शन – घनी आबादी के बीच संचालित टावर -अवहेलना . नियम को धता बता टेलिकॉम कंपनियों ने शहर में बिछाया टावरों का जाल — नगर परिषद से पंजीकरण करवाना व अनापत्ति पत्र लेना भी नहीं समझा मुनासिब — पूरे शहर में घनी आबादी के बीच […]
सुकून की जिंदगी पर टावरों का पहरा फोटो – मधेपुरा 08कैप्शन – घनी आबादी के बीच संचालित टावर -अवहेलना . नियम को धता बता टेलिकॉम कंपनियों ने शहर में बिछाया टावरों का जाल — नगर परिषद से पंजीकरण करवाना व अनापत्ति पत्र लेना भी नहीं समझा मुनासिब — पूरे शहर में घनी आबादी के बीच संचालित हो रहे दर्जनों टावर प्रतिनिधि, मधेपुरा मधेपुरा नगर परिषद क्षेत्र में नियम कानून को धता बताते हुए कई अंतरराष्ट्रीय व बड़ी टेलीकॉम कंपनी अपना-अपना टावर स्थापित कर संचालित कर रही है. इन टावरों का पंजीकरण नगर परिषद से नहीं करवाया गया है और कंपनी नगर परिषद को नियामनुकूल किसी भी प्रकार के राजस्व का भुगतान नहीं करती है. नियमत: टावर के निर्माण से पूर्व नगर परिषद में कई तरह के महत्वपूर्ण दस्तावेज जमा कर पंजीकरण करवाना है. पंजीकरण शुल्क के रूप में टेलीकॉम कंपनी एक टावर का 40 हजार रुपये भुगतान करेंगी. नगर परिषद से अनापत्ति प्रमाणपत्र निर्गत होने के बाद ही टावर का निर्माण करवाया जाना है. टावर संचालित होने के बाद कंपनी प्रत्येक वर्ष नगर परिषद में वार्षिक नवीकरण शुल्क जमा कर अपने टावर का संचालन करेंगी. लेकिन नगर परिषद की उदासीनता का फायदा उठा कर दर्जनों कंपनियां वर्ष 2004 से लगातार कानून की धज्जियां उड़ाते हुए मनमाने तरीके से काम कर रही है. हालांकि हाल के वर्षों में नगर परिषद टेलिकॉम कंपनियों पर अपने राजस्व को लेकर पंजीकरण का दबाव बना रही है. लेकिन मामला चिटठी – चिटठी खेलने में ही उलझा हुआ है. — तीस से अधिक टावर हो रहे संचालित — नगर परिषद क्षेत्र में वर्तमान समय में बिना पंजीकरण के तीस से अधिक मोबाइल टावर संचालित हो रहे है. हालांकि वर्ष 2014 में नगर परिषद कार्यालय द्वारा महालेखाकार (ऐजी) पटना को भेजे गये पत्र में 28 टावर के संचालन होने की रिपोर्ट की गयी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन के छह, एटीसी इंडिया टावर लिमिटेड के एक, टाटा टेलिकॉम के दो, एयरसेल कंपनी के सात, भारती एयरटेल लिमिटेड के दो, बीएसएनएल के दो, इंडिया टेलिकॉम लिमिटेड के एक, रिलाइंस इनफोकॉम लिमिटेड के एक, एस्सार टेलिकॉम के एक, सिस्टेमा श्याम टेली सर्विसेज के एक, भारती टेली मेयर के एक, भारतीय टेलिमेचर के एक, भारतीय सेलूलर के एक, रिलाइंस इंफोकॉम के एक और रिलाइंस के एक टावर संचालित होने की रिपोर्ट भेजी गयी थी. 2014 के बाद भी नगर परिषद क्षेत्र में कई टावर के निर्माण होने की बात कही जा रही है. — लाखों का राजस्व है बकाया — महालेखाकार को भेजी गयी रिपोर्ट के मुताबिक छह टेलिकॉम कंपनियों को छोड़ कर किसी अन्य कंपनी ने अपना पंजीयन नगर परिषद से नहीं करवाया है. इन कंपनियों के पास सिर्फ पंजीयन शुल्क के रूप में आठ लाख 80 हजार रूपये बकाया है. वहीं प्रतिवर्ष नवीकरण शुल्क के रूप में सभी कंपनियों के पास बीस लाख 70 हजार रूपये बकाया रहने की रिपोर्ट भेजी गयी थी. वर्तमान समय में नगर परिषद का बकाया और भी ज्यादा हो चुका है. लेकिन बेपरवाह बने टेलिकॉम कंपनी भुगतान के प्रति जागरूक नहीं दिख रही है. — जनजीवन को कर रहा बीमार — ज्ञात हो कि घनी आबादी के बीच टावर निर्माण पर सख्ती के साथ रोक लगायी गयी है. लेकिन बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र के बनाये गये टावर घनी आबादी के बीच ही खड़े कर दिये गये है. ज्ञात हो कि टावर से निकलने वाले कई तरह के रेडिएशन के कारण पर्यावरण दूषित होता है. साथ ही मानव पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. लेकिन इन मोबाइल टावरों के निर्माण के समय लोक हित और पर्यावरण की अनदेखी की गयी. — पत्र भेजा पर, कार्रवाई नहीं — टेलिकॉम कंपनियों की मनमानी देख कर हाल के दिनों में नगर परिषद अपने राजस्व को लेकर सख्त हुआ और सभी टावर के संचालक कंपनियों को पत्र भेज कर पंजीकरण करवाने का निर्देश दिया. साथ ही सभी बकाया राजस्व समय सीमा के अंदर जमा करने नहीं तो टावर को सील कर बंद करने की कार्रवाई की चेतावनी भी दी. लेकिन नतीजा सिफर निकला. अब तक मात्र छह कंपनियों ने ही पंजीकरण के लिए दस्तावेज नगर परिषद को सौंपा है. — वर्जन — टेलिकॉम कंपनियों की मनमानी के खिलाफ उन्हें कड़ा पत्र निर्गत किया गया है. लेकिन टेलिकॉम कंपनी सजग नहीं दिखाई दे रही है. विभाग से दिशा निर्देश प्राप्त कर टावरों को सील करने की कार्रवाई की जायेगी. विशाल कुमार बबलू, मुख्य पार्षद, मधेपुरा .
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