महापर्व छठ: आज कद्दू भात, कल खरना

महापर्व छठ: आज कद्दू भात, कल खरना फोटो- मधेपुरा 21कैप्शन- कद्दु भात को लेकर बाजार में कद्दु की खरीदारी कर रहे लोग – फोटो- मधेपुरा 22कैप्शन- बाजार में गन्ने की खरीद करतीं छठ व्रती महिला. प्रतिनिधि, मधेपुरा चार दिनों तक मनाया जाने वाले लोक आस्था का महापर्व छठ अत्यंत ही कठिन पर्व है जो आज […]
महापर्व छठ: आज कद्दू भात, कल खरना फोटो- मधेपुरा 21कैप्शन- कद्दु भात को लेकर बाजार में कद्दु की खरीदारी कर रहे लोग – फोटो- मधेपुरा 22कैप्शन- बाजार में गन्ने की खरीद करतीं छठ व्रती महिला. प्रतिनिधि, मधेपुरा चार दिनों तक मनाया जाने वाले लोक आस्था का महापर्व छठ अत्यंत ही कठिन पर्व है जो आज से शुरू हो रहा है. पर्व का पहला दिन नहाय खाय से शुरू हो कर कद्दू भात के साथ संपन्न होगा. वहीं दूसरे दिन यानी कल खरना पर्व के रुप में मनाया जायेग. खरना के रोज व्रती दिन भर उपवास रख कर शाम को अरवा भोजन करेगी. इस अवसर पर जिला मुख्यालय के अलावा सिंहेश्वर बाजार सहित विभिन्न बाजारों में को छठ पर्व की खरीदारी करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी. इस दौरान व्रती के लिए लोग वस्त्र आदि खरीद रहे थे. वहीं छठ के दौरान बाजार में डाला,सूप,नारियल,टाभ व नींबु की दुकानों पर अधिक भीड़ थी. बाजार में कद्दू का दाम आम दिनों के अपेक्षा अधिक देखी गयी. शनिवार को बाजार में कद्दु जहां 20 से 30 रूपये तक बिका. वहीं नारियल 20 से 30, टाब 10 से 15, केतारी 5 से 10, सेब 50 से 80, टोकरी 60 से 150 रुपये तक बिक रहा था. आमदनी बढ़ने से महंगाई पर लगा ब्रेक छठ पूजा को लेकर बाजार में पूजा सामग्रियों की आमदनी बढ़ने से महंगाई पर ब्रेक लग गया. शनिवार को बाजार में कद्दू के दामों में खास वृद्धि नहीं देखी गयी. हालांकि पूजा सामग्रियों में आम दिनों के अपेक्षा तेजी देखी जा रही है. लेकिन गत वर्षों में देखा गया है कि बाजार में आमदनी रहने के कारण पूजा सामग्रियों के दामों में आग लग जाती थी. सिंहेश्वर में आढ़त व्यापारी अमित कुमार, राकेश कुमार पिंटू, चंदन कुमार ने कहा कि आस-पास के ग्रामीण इलाकों से इस वर्ष पूजा सामग्रियों की भारी आमदनी हो रही है. यही कारण रहा है कि कद्दू भात पर भी कद्दू के दामों में खास इजाफा नहीं हो सका. जाम से हलकान रहा सिंहेश्वर बाजार सुप्रिसद्ध सिंहेश्वर स्थान में शनिवार को श्रद्धालुओं के अलावा खरीदारी करने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. इस दौरान सिंहेश्वर बाजार जाम से हलकान रहा. दुर्गा चौक से लेकर पेट्रोल पंप तक गाड़ियों की लंबी लाइन लगी रही. सिंहेश्वर बाजार से गुजरने में लोगों को घंटों का समय लग रहा था. दिन भर सिंहेश्वर में गाड़ियां रेंगती रही. बाजार में सड़क पर दुकान सजने एवं ऑटो चालकों की मनमानी से जाम की यथावत स्थिति प्रत्येक दिन बनी रहती है. लेकिन सड़क पर से अतिक्रमण हटाने को लेकर स्थानीय प्रशासन उदासीन बनी हुई है. —- इनसेट ——- प्रभात खास—- आस्था के साथ हिंदू मुसलिम एकता का प्रतीक है महापर्व छठ – जिले में मनोकामना पूर्ण होने पर मुसलिम परिवार भी विभिन्न जगहों पर मनाते हैं महापर्व छठ- एक साथ छठ मना कर हिंदू मुसलिम भाईचारे का किया जा रहा है मिसाल कायममधेपुरा. पौराणिक कथा के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी में मनाये जाने वाले महा पर्व छठ का उल्लेख रामायण काल में भी मिलता है. मान्यता है कि मगघ सम्राट जरासंध के पूर्वज को कुष्ठ रोग दूर करने के लिए मग ब्राहम्णों ने सूर्योपासना की थी. तभी से छठ पर्व पर सूयार्ेपासना का प्रचलन प्रारंभ है. छठ पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. वहीं जिले में मनोकामना पूर्ण होने पर मुसलिम परिवार भी कई जगहों पर यह पर्व मनाते है. लोक आस्था है कि सच्चे मन से की गयी छठ पूजा से मनुष्य की सारी मनोकामना पूर्ण होती है. – राम और सीता ने उपवास रख की भगवान सूर्य की आराधनाछठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व का प्रतिपादन करने वाले कई पौराणिक व लोक कथाएं प्रचलित है. पौराणिक कथा के अनुसार लंका विजय के बाद जब भगवान श्रीराम अयोध्या में रामराज की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान श्री राम और माता सीता ने उपवास रख कर भगवान सूर्य की आराधना की थी. सप्तमी को सूर्योदय के समय पुन: अनुष्ठान कर सूर्य देवता से आशीर्वाद लिया और रामराज की स्थापना की.- सूर्य की कृपा दृष्टि से महान योद्धा बना था कर्ण दूसरी मान्यता के अनुसार महा पर्व छठ की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी. महाभारत काल में सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देवता की पूजा शुरू की थी. कर्ण भगवान सूर्य का परम भक्त था. वह प्रतिदिन घंटो पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देता था. भगवान सूर्य की कृपा दृष्टि से ही वह महान योद्धा बना था. छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा कायम है. – द्रौपदी ने की थी छठ व्रत, पांडव को मिला था राज पाट एक कथा के अनुसार पांडव व कौरव के बीच महाभारत हुआ था. महाभारत होने से पूर्व कौरवों के साथ पांडव अपना सारा राज पाट जुए मे हार गया, तब द्रौपदी ने छठ व्रत की थी. जिससे द्रौपदी की मनोकामना पूरी हुई, पांडव ने महाभारत में कौरवों पर विजय प्राप्त किया और पांडवों को राज पाट वापस मिल गया था. – महापर्व छठ में खरना का है विशेष महत्व लोक आस्था है कि महा पर्व छठ में खरना का विशेष महत्व है. इस दिन व्रत करने का वाले छठ वर्ती नियम व निष्ठा के साथ रात में रसीया, पूरी, फल इत्यादि से नये वस्त्र पहनकर खरना करती हैं. खरना करते वक्त यदि मुंह में कंकड़ टकरा जाए या कोई व्यक्ति द्वारा पर्व करने वाले को आवाज भी लगा दे तों उसी वक्त व्रती खाना बंद कर देती है. खरना के बाद सूर्य देवता को अर्घ्य देने की परंपरा है. – मनोकामना पूर्ण होने पर सभी धर्म के लोग करते है महापर्व छठ महापर्व छठ के महत्व को सभी धर्मों के लोग आस्था के साथ मानते है. यही कारण है कि हिंदू हो या मुसलमान मनोकामना पूर्ण होने पर सभी धर्म के लोग छठ पूजा करते हैं. इसका एक उदाहरण जिले के सिंहेश्वर प्रखंड स्थित पटोरी पंचायत में वर्षों से देखा जा रहा था. पटोरी स्थित दुब्बी घाट पर हिंदू व मुसलमान एक साथ छठ पर्व मनाते है. यहां मनोकामना पूर्ण होने पर एक मुसलमान परिवार सूप में फल, पुरी, ईख आदि को रखकर सूर्य भगवान को अर्घ्य देते हैं. इस घाट पर पटोरी वार्ड नंबर सात निवासी मो. अली हसन की पत्नी सुबैदा खातुन वर्षों से छठ पर्व करती आ रही है. इस परिवार के सभी सदस्य छठ के मौके पर पानी में खड़ा हो सूर्य को अर्घ्य देते है. – हिंदू मुसलिम भाईचारे की कायम हुई मिसाल जिले में छठ व्रती सुबैदा खातुन पति मो. अलि हसन एवं ससुर मो नुरो मियां व परिवार के सभी सदस्य जहां हिंदू मुसलिम भाईचारे का प्रतीक है. वहीं छठ पर्व से हिंदू मुसलिम एकता की मिसाल कायम होती हैं. विभिन्न धर्म समुदाय के लोग भी सूर्य उपासना को महत्व देते है और अपने मनोकामना की पूर्ति के लिए छठ वर्त पूरी आस्था व निष्ठा के साथ मनाते हैं और मिल जुल कर सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर आपसी भाईचारे को मजबूत करते है.
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