भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है काली माता, वैष्णव रीति से होती है पूजा

Updated at : 29 Oct 2019 8:23 AM (IST)
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भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है काली माता, वैष्णव रीति से होती है पूजा

मधेपुरा : जिला मुख्यालय के भिरखी पुला के समीप स्थित दक्षिणेश्वर काली माता के मंदिर का इतिहास वर्षों पुराना है. कहते है यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है. इसके कारण दूर-दूर से श्रद्धालु काली माता के दर्शन के लिए आते हैं. 40 वर्ष पुरानी इस वैष्णवी काली मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं […]

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मधेपुरा : जिला मुख्यालय के भिरखी पुला के समीप स्थित दक्षिणेश्वर काली माता के मंदिर का इतिहास वर्षों पुराना है. कहते है यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है. इसके कारण दूर-दूर से श्रद्धालु काली माता के दर्शन के लिए आते हैं. 40 वर्ष पुरानी इस वैष्णवी काली मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण हुई है.

मंदिर के अध्यक्ष गोपी पंडित बताते हैं शुरुआत में मंदिर कि जब स्थापना नहीं हुई थी, उस समय भीरखी पुल के समीप खाली मैदान में हर दीपावली में मूर्ति की स्थापना करके पूजा की जाती थी. जिसके बाद भीरखी पुल के समीप कुछ दिनों तक टेंट लगाकर मां काली की पूजा हुई. गोपी पंडित आगे कहते हैं जो भी सच्चे मन से श्रद्धा व आस्था के साथ मां काली के दरबार में आया है. उसकी मनोकामना पूर्ण हुई है. मनोकामना पूर्ण होने के पश्चात श्रद्धालुओं ने मिल कर मंदिर निर्माण करवाया.
भक्तों की मुराद पूरी करती है माता : लगभग 15 वर्ष पूर्व मंदिर के संस्थापक रामप्रताप साह हलवाई व गोपी पंडित ने मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया. जिसमें मनीष सर्राफ, पशुपति सुल्तानिया, शत्रुघ्न भगत, प्रो अशोक कुमार यादव, राजेश साह, सीएन झा, विपुल विभाकर आदि ने दान देकर मंदिर निर्माण कार्य में सहयोग प्रदान किया.
इसके अलावा काली मां की मूर्ति राजेश यदुवंशी ने अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद बनवाई. वही सूर्य देव की मूर्ति जिला मुख्यालय के निवासी उपेंद्र यादव ने बनवाया है. मंदिर में शनिचर यादव जो कि मूलतः सहरसा जिले के निवासी हैं. फिलहाल दक्षिणेश्वर काली मंदिर के पुजारी हैं. अपना पूरा समय मंदिर की देखरेख में देते हैं.
कुमहर की बलि देकर चढ़ाया जाता है प्रसाद : भिरखी पुल के समीप स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर में किसी जीव की बलि नहीं चढ़ाई जाती है. बल्कि कुमहर की बलि देकर मां को चढ़ावा चढ़ाया जाता है. रामप्रताप सा हलवाई के पोते उत्तम कुमार साह बताते हैं की यह वैष्णवी काली है. इसके कारण यहां बलि प्रदान नहीं किया जाता है, लेकिन कुछ लोग जो कि बलि चढ़ाने की इच्छा से मां के दरबार में आते हैं उन्हें बलि का निरीक्षण करवा कर स्टेशन के समीप स्थित काली मंदिर में बलि प्रदान के लिए भेज दिया जाता है. मंदिर के पुजारी शनिचर यादव ने बताया कि यहां कुमहर की बलि दीपावली के रोज दी जाती है.
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