एनएच 107: सबैला में हटाया गया अतिक्रमण चकला तक शुरू है चौड़ीकरण का काम
Updated at : 02 Jul 2019 8:11 AM (IST)
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मधेपुरा : बीते पांच साल में जर्जर व बदहाल ही नहीं गड्डों में तब्दील हो चुकी एनएच 107 पर दोहरीकरण का काम शुरू है. मधेपुरा से सहरसा जाने वाली एनएच 107 पर फिलवक्त जिले की सीमा के अंदर सड़क निर्माण शुरू होने से लोगों में बेहतर व सुलभ आवागमन की उम्मीद दिखने लगी है. पहले […]
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मधेपुरा : बीते पांच साल में जर्जर व बदहाल ही नहीं गड्डों में तब्दील हो चुकी एनएच 107 पर दोहरीकरण का काम शुरू है. मधेपुरा से सहरसा जाने वाली एनएच 107 पर फिलवक्त जिले की सीमा के अंदर सड़क निर्माण शुरू होने से लोगों में बेहतर व सुलभ आवागमन की उम्मीद दिखने लगी है.
पहले चरण में निर्माण एजेंसी द्वारा शहर के काॅर्मस कॉलेज से चकल तक चौड़ीकरण का काम पूरा किया जा रहा है. उक्त सड़क पर मिट्टी वर्क के बाद जीएसबी का काम भी पूर्ण होने के कगार पर है.
कंपनी के कर्मियों ने बताया कि अभी डस्ट देकर जीएसबी को पूर्ण किया जा रहा है. इसके अलावा मधेपुरा-सहरसा के सीमा पर सबैला में भी सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाया गया है. विभाग के अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण करने वाले लोगों को ससमय जगह खाली करने का निर्देश भी दिया गया है.
धूल पर नहीं दे रहे पानी : विभागीय निर्देश के बावजूद निर्माण एजेंसी जनहित के बजाय कई बिंदुओं पर लापरवाही कर रही है. सड़क निर्माण की वजह से सड़क के दोनों किनारे मिट्टी व डस्ट का ढ़ेर लगा हुआ है.
ऐसे में वाहनों के आवाजाही के दौरान एनएच पर धूल का गुब्बार देखने को मिलता है. ऐसे में राहगीरों को आवाजाही में काफी परेशानी होती है. इसके बावजूद समय-समय पर निर्माण कर रही कंपनी द्वारा कार्य स्थल पर नियमित पानी का छिड़काव टैंक के द्वारा नहीं कराया जाता है.
सड़क के साथ दिखेगा बदलाव : व्यवसायिक दृष्टिकोण से बदतर हो चुकी एनएच 107 पर भी सड़क निर्माण के बाद कई बदलाव एक साथ देखने को मिलेंगे. खासकर सड़क किनारे बंद हो चुके दुकानों पर पुन: व्यवसायिक गतिविधि शुरू की जा सकेगी. ज्ञात हो कि बदहाल हो गयी सड़क की वजह से लोग दूसरे मार्ग का उपयोग करने लगे. जिसका खामियाजा एनएच के दोनों तरफ व्यवसाय करने वाले लोगों को बेकारी के रूप में भुगतना पड़ रहा है.
… तो अब होगी घरों में भी चमक
एनएच पर उड़ती धूल का आलम यह है कि कई जगहों पर लोगों ने दरवाजे में परदे की जगह प्लास्टिक ही टांग ली थी. इसके अलावा सड़क किनारे बने रिहायश में सिर्फ धूल जमे रहते थे. ऐसे में लोगों ने बड़े अवसरों पर भी घरों को पेटिंग से दूर ही रखा है. फिलवक्त सड़क निर्माण पूरा होने के बाद क्षेत्र के लोगों को धूल से भी निजात मिलेगी. नतीजतन घरों की दीवार व उसकी चमक भी वापस लौटेगी.
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के जिस वेबसाइट पर स्नातकोत्तर का रिजल्ट जारी कर छात्रों का दीक्षांत समारोह मनाया गया था, उसी वेबसाइट से और छात्रों की तरह उन्होंने भी रिजल्ट देखा था. रिजल्ट में वे चारों छात्र पास थे. छात्रों ने कहा कि महीनों तक विश्वविद्यालय के द्वारा अंक प्रमाण पत्र नहीं दिया गया. जिसके बाद उन्होंने महाविद्यालय से भी संपर्क कर महाविद्यालय में पहुंचे टीआर को देखकर तत्काल अंक प्रमाण पत्र भी बनवाया था.
जिसपर महाविद्यालय के प्राचार्य सहित अन्य अधिकारियों का हस्ताक्षर भी किया गया है, लेकिन जब विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालय में अंक प्रमाण पत्र भेजा गया तो उसमें उन लोगों को फेल कर दिया गया है. छात्रों का कहना है कि अगर रिजल्ट प्रकाशित होने के समय ही उन्हें यह रिजल्ट मालूम होता तो उसके बाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित परीक्षा में वे भाग ले सकते थे.
लेकिन विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण वे परीक्षा में भाग नहीं ले पाए. जिसके कारण उनका दो साल बर्बाद हो चुका है. छात्रों ने कहा कि उन चारों छात्रों का अगर विश्वविद्यालय के वेबसाइट पर जारी किया गया रिजल्ट गलत है तो अन्य छात्रों के रिजल्ट की भी जांच होनी चाहिए. जिन्हें दीक्षांत समारोह में प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया है.
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