गांव जाने के लिए नहीं है कोई रास्ता, नहीं होती बेटियों की शादी

Updated at : 25 Mar 2019 6:28 AM (IST)
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गांव जाने के लिए नहीं है कोई रास्ता, नहीं होती बेटियों की शादी

उदाकिशुनगंज : उदाकिशुनगंज मुख्यालय अंतर्गत बिहारीगंज प्रखंड क्षेत्र के गमैल पंचायत वार्ड संख्या 14 मुस्लिम टोला की स्थिति देखकर सहज ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है क्षेत्र के अधिकारी सहित संसद एवं विधयाक ने कैसा कार्य किया है. यह गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. इस लंबे सफर में विकास के कई […]

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उदाकिशुनगंज : उदाकिशुनगंज मुख्यालय अंतर्गत बिहारीगंज प्रखंड क्षेत्र के गमैल पंचायत वार्ड संख्या 14 मुस्लिम टोला की स्थिति देखकर सहज ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है क्षेत्र के अधिकारी सहित संसद एवं विधयाक ने कैसा कार्य किया है. यह गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है.

इस लंबे सफर में विकास के कई सोपान लिखे गये. देश ने सूई बनाने से लेकर हवाई जहाज, राकेट, उपग्रह बनाने के साथ चांद और मंगल तक का सफर पूरा किया. मगर कुछ तस्वीरें हैं जो इन उपलब्धियों को चिढ़ा रही हैं. आजादी के 70 साल बाद भी मुख्यालय में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अब भी बिजली नहीं पहुंच पायी है.
मुख्यालय के क्षेत्रों में अभी तक न तो सड़कें बनी ना बिजली के तार खिंचे. कई क्षेत्रों में लाखों कवायदों के बाद भी मूलभूत सुविधा को पूरी करने में अफसर असफल साबित हुए हैं.
कई गांव बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे है. बिहारीगंज प्रखंड क्षेत्र के गमैल पंचायत वार्ड संख्या 14 मुस्लिम टोला आज भी विकास के लिए तरस रहा है. गांव के लोगों को बाहर निकलने के लिए रास्ता तक नहीं है. न शौचालय, न बिजली, न पानी गांव के लोग मानों गुलाम के जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं.
आज भी गांव के लोग बाहर शौच करने को हैं विवश : सरकार के रहनुमाओं ने इस गांव की ओर देखना मुनासिब नहीं समझा. गांव के लोग आज भी शौच के लिए बाहर जाते हैं.
इस गांव में आज भी लालटेन व ढिबरी से की रोशनी में सभी कार्य होते है. समय बीतता गया गांव के कुछ दूरी पर एसएच 91 के रूप में विकास की बड़ी लकीर खींची गई. लेकिन रहनुमाओं की उपेक्षा ने गमैल पंचायत के वार्ड संख्या 14 मुस्लिम टोला को गर्क में ला कर रख दिया है.
पांच सौ से हजार की आबादी वाले इस गांव में आने जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है. गांव के लोग नदी-नहर को पार कर आवाजाही करते हैं. गांव के लोग दीवारों और दूसरों के घरों से होकर जाया करते हैं. इस वजह से प्रायः लोगों के बीच कहासुनी होती रहती है. यह गांव तीनों ओर से नदी और नहर से घिरा हुआ है.
चारों तरफ से घिरे लोग किसी तरह मेहनत मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं. क्षेत्र के तमाम बच्चे शिक्षा से वंचित हैं. कई बच्चे किसी तरह नहर को पार कर विद्यालय तो पहुंच जाते हैं लेकिन बच्चों के परिजन को उनके लौट आने की चिंता पूरे दिन तक सताती है.
खुले में जाते हैं शौच : गांव के मो असफाक, मो अंजार, मो यूनुस, एहतेशाम, बीबी नूरानी आदि मोहल्ले के लोग बताते हैं कि शौचालय निर्माण के नाम पर खानापूर्ति हुई है. सभी लोग शौच के लिए बाहर जाते हैं.
बहू-बेटियां खुले में शौच जाने से डरती-कतराती हैं, लेकिन व्यवस्था के आगे भी नतमस्तक हो जाते हैं. वे लोग किसी तरह से मेहनत मजदूरी कर जीवन व्यतीत करते हैं, शौचालय निर्माण कैसे करायेंगे. ऐसे में भी सरकारी योजना का लाभ मुंह चिढाती है.
क्षेत्र के पूर्व मुखिया सिकंदर यादव कहते हैं कि यह वार्ड दशकों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. कई बार रास्ते के लिए पहल किया गया लेकिन सभी प्रयास विफल रहे. अब क्षेत्र के लोग ऊब चुके हैं. लोगों का जीवन अंधकारमय हो चुका है. विभाग के अधिकारी मामले में पहल कर सैकड़ों लोगों की जिंदगी संवार सकते हैं.
नहीं करना चाहता कोई बेटी से शादी
गांव की बदहाल स्थिति को लेकर कोई परिवार अपनी बेटी इस गांव में नहीं देना चाहता है. यहां के लोग मजबूर और बेबस हो चुके हैं. नतीजा यह है कि लोग अपनी बेटी की शादी से गांव में करना मौत के मुंह में धकेलने जैसा समझते हैं. किसी साधन के ना होने से बेटियां ताउम्र अपना जीवन बिना सुख सुविधा के गुजारने को मजबूर हैं.
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