ज्ञान के दो रूप एक परा व दूसरा अपरा

मधेपुरा : आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया है. इसमें मुख्य प्रशिक्षक आचार्य पुर्णदेवा-नंद अवधूत है. सेमिनार का मुख्य विषय है ‘वेद में ब्रहम विज्ञान, मानव जीवन में साधना की प्रयोजनीयता व विकेंद्रीत अर्थव्यवस्था’. आनंद मार्ग स्कूल वार्ड नंबर तीन पीएचइडी रोड मधेपुरा में आयोजित सेमिनार के […]
मधेपुरा : आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया है. इसमें मुख्य प्रशिक्षक आचार्य पुर्णदेवा-नंद अवधूत है. सेमिनार का मुख्य विषय है ‘वेद में ब्रहम विज्ञान, मानव जीवन में साधना की प्रयोजनीयता व विकेंद्रीत अर्थव्यवस्था’. आनंद मार्ग स्कूल वार्ड नंबर तीन पीएचइडी रोड मधेपुरा में आयोजित सेमिनार के पहले दिन शनिवार को चर्चा करते हुए मुख्य प्रशिक्षक ने कहा कि वेद में ब्रह्मन विज्ञान विषय पर मुख्य प्रशिक्षक ने कहा कि वेद शब्द की उत्पत्ति विद् धातु से हुई है, जिसका अर्थ होता है ज्ञान. ज्ञान का दो रूप है. एक है परा ज्ञान और दूसरा है अपरा ज्ञान. परा ज्ञान है जागतिक ज्ञान और अपरा ज्ञान पारलौकिक ज्ञान आध्यात्मिक ज्ञान है.
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