यहां रोज बेपरदा होते हैं लोग

Published at :27 Jul 2017 5:40 AM (IST)
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यहां रोज बेपरदा होते हैं लोग

िवभागीय उदासीनता. बस स्टैंड में शौचालय व शुद्ध पेयजल का अभाव लाखों का राजस्व देने वाला मधेपुरा बस स्टैंड बुरी तरह से बदहाल है. हैरत यह है कि यहां से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर जिले का सर्वोच्च कार्यालय स्थित है. फिर भी यहां की सूरत नहीं बदली. मधेपुरा : मधेपुरा बस स्टैंड […]

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िवभागीय उदासीनता. बस स्टैंड में शौचालय व शुद्ध पेयजल का अभाव

लाखों का राजस्व देने वाला मधेपुरा बस स्टैंड बुरी तरह से बदहाल है. हैरत यह है कि यहां से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर जिले का सर्वोच्च कार्यालय स्थित है. फिर भी यहां की सूरत नहीं बदली.
मधेपुरा : मधेपुरा बस स्टैंड से पटना, भागलपुर, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, बीरपुर, जोगबनी, दरभंगा, मधुबनी आदि जगहों के लिए रोज छोटी बड़ी गाड़ियों का परिचालन होता है. यहां से संवेदक को लाखों की उगाही होती है. तभी तो जिला परिषद के अंतर्गत इस बस स्टैंड की नीलामी भी लाखों में ही होती है. विडंबना है कि लाखों का राजस्व देने वाला यह मधेपुरा बस स्टैंड बुरी तरह से बदहाल है. हैरत यह है कि यहां से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर जिले का सर्वोच्च कार्यालय स्थित है. फिर भी यहां की सूरत नहीं बदली.
लाखों का राजस्व देने वाला मधेपुरा बस स्टैंड अपने बदहाली का रोना रो रहा है. यहां यात्रियों को किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिल रही है. गरमी का मौसम हो या बारिश का मौसम यात्री को बैठने तक की सुविधा नहीं है. यात्री विश्राम गृह होने के बावजूद यात्रियों को घोर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बस स्टैंड में चारों तरफ गंदगी है. यात्री विश्राम गृह भी है लेकिन किसी काम का नहीं. विश्राम गृह के आस पास कचरे का ढेर लगा हुआ है. साथ ही विश्राम गृह के सामने पेड़ पौधे निकल आये हैं. यहां यात्रियों के आराम मिलना तो दूर वे फटकते भी नहीं हैं. हल्की बारिश में भी पूरे बस स्टैंड परिसर में जल जमाव हो जाता है
. बारिश खत्म होने के एक – दो सप्ताह से अधिक दिनों तक बस स्टैंड में पानी जमा रहता है. पूरे परिसर में फैली गंदगी जब धीरे-धीरे पानी के साथ सड़ने लगती है तो लोग दस कदम दूर से ही नाक दबा कर निकलते हैं. हालांकि प्रभात खबर ने इस बारे में खबर प्रकाशित कर आलाधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराने की कोशिश की लेकिन साहब हैं कि सुनते नहीं.
बस स्टैंड में हमेशा रहता है दुर्गंध का माहौल. मुन्ना राजा एवं अशोक राय कहते है बस स्टैंड में नालियों की सफाई नहीं होने से उसमें पड़े कूड़े कचरे के कारण हमेशा दुर्गंध का वातावरण बना रहता है. लोगों द्वारा नालियों में मूत्र विसर्जन करने से दुर्गंध फैली रहती है. कभी डीडीटी पाउडर का भी छिड़काव नहीं होता है. गंदगी के कारण यात्रियों के साथ – साथ वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
मधेपुरा बस स्टैंड में नहीं हैं यात्री सुविधाएं, विश्राम गृह होने के बावजूद बन गया कचरा घर
पटना, भागलपुर पूर्णिया, सहरसा,सुपौल बीरपुर, जोगबनी दरभंगा, मधुबनी आदि जगहों के लिए चलती हैं गाड़ियां
कहते हैं वाहन चालक
एक वाहन के चालक मुकेश राम कहते हैं कि बस स्टैंड पर यात्री विश्राम गृह तो बना दिया गया लेकिन धीरे धीरे यह कूड़ेदान में बदल कर रह गया है. अब तो यहां पेड़ पौधे निकल गये है. अच्छा हो कि इसे पार्क बना दिया जाय. फिलहाल तो यह किसी काम का नहीं. धूल और कचरा होने के कारण मुसाफिर इस ओर जाते नहीं. आस पास लोग मूत्र भी त्याग करते है. इसके कारण विश्राम गृह के अगल बगल दुर्गंध फैली रहती है.
यात्रियों को परेशानी
ललन कुमार एवं छोटू मिस्त्री कहते हैं कि एक तरह से विश्राम गृह परित्यक्त हो गया है. अब इस बरसात के मौसम में यात्री बस का इंतजार करते हुए हमेशा सशंकित रहते हैं कि कहीं बारिश न आ जाये. और अगर भगवान ने उनकी नहीं सुनी तो वे कहां छुप कर खुद को भीगने से बचायेंगे यह भगवान ही जानें. और अगर तेज धूप निकल गयी तो पेड़ के नीचे आसरा ले लेते हैं. महिला यात्री की तो इस बस स्टैंड पर फजीहत ही हो जाती है. पुरुष तो इधर उधर हल्का हो लेते हैं लेकिन शौचालय नहीं होने के कारण महिला यात्रियों को भारी परेशानी होती है. लोगों को शौचालय के अभाव में बेपरदा होना पड़ता है.
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