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बिहार में मिली एक करोड़ रुपये में बिकने वाली छिपकली, जानें इसकी खासियत और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत

Updated at : 30 Nov 2022 4:32 PM (IST)
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बिहार में मिली एक करोड़ रुपये में बिकने वाली छिपकली, जानें इसकी खासियत और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत

पूर्णिया पुलिस ने जिस छिपकली को बरामद किया है, उसकी कीमत एक करोड़ रुपये है. पूर्णिया पुलिस ने छापेमारी कर 'टोकाय गेयको' नस्ल की काली छिपकली बरामद किया है.

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बिहार के पूर्णिया जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है. पूर्णिया में एक ऐसी छिपकली (chipkali) मिली है, जिसकी कीमत एक करोड़ रुपये बतायी जा रही है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस छिपकली (chipkali) की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है. इस छिपकली को टोकाय गेयको के नाम से जाना जाता है. इस छिपकली के साथ पूर्णिया पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया है. छिपकली (chipkali) को तस्करी के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर इस छिपकली को दवा की दुकान से बरामद किया है.

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बरामद छिपकली की कीमत एक करोड़ रुपये

बताया जा रहा है कि पूर्णिया पुलिस ने जिस छिपकली को बरामद किया है, उसकी कीमत एक करोड़ रुपये है. पूर्णिया पुलिस ने छापेमारी कर ‘टोकाय गेयको’ नस्ल की काली छिपकली को जब्त किया है. वहीं, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक है. इसके अलावा दुकान में 50 पैकेट कोडीन युक्त कफ सिरप भी बरामद किया गया. इसकी जानकारी एसडीपीओ ने दी है.

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पश्चिम बंगाल से लाई गई थी छिपकली

एसडीपीओ ने बताया कि छिपकली को पश्चिम बंगाल के करंडीघी से लाया गया था. इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए लोगों से पूछताछ की जा रही है. बहुत जल्द ही इस गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा. बताया जा रहा है कि इस छिपकली का उपयोग मर्दानगी बढ़ाने वाली दवाओं के निर्माण में होता है. इसके मांस से नपुंसकता, डायबिटीज, एड्स और कैंसर की परंपरागत दवाएं बनाई जाती हैं. इसका उपयोग मर्दानगी बढ़ाने के लिए भी किया जाता है.

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कहां कहां पायी जाती है ‘टोकाय गेयको’

‘टोकाय गेयको’ एक दुर्लभ छिपकली है, जो ‘टॉक-के’ जैसी आवाज निकालती है, जिसके कारण इसे ‘टोके गेको’ कहा जाता है. यह छिपकली दक्षिण-पूर्व एशिया, बिहार, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, पूर्वोत्तर भारत, फिलीपींस तथा नेपाल में पाई जाती हैं. जंगलों की लगातार कटाई होने के कारण इस प्रजाति की छिपकली खत्म होती जा रही है.

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