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फेस अटेंडेंस नियम के विरोध में एएनएम-आर व सीएचओ की हड़ताल

Updated at : 22 Jul 2024 9:23 PM (IST)
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फेस अटेंडेंस नियम के विरोध में एएनएम-आर व सीएचओ की हड़ताल

फेस अटेंडेंस (एफआरएएस) नियम के विरोध में सोमवार को जिलेभर में सीएचओ व एएनएम-आर कार्य बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये.

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सूर्यगढ़ा. फेस अटेंडेंस (एफआरएएस) नियम के विरोध में सोमवार को जिलेभर में सीएचओ व एएनएम-आर कार्य बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये. सूर्यगढ़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीएचओ एवं एएनएम-आर ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ वाईके दिवाकर की अनुपस्थिति में प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक प्रफुल्ल कुमार को आवेदन देकर इसकी जानकारी दी. मामले को लेकर एएनएम-आर शिवानी जायसवाल ने बताया कि सोमवार से उन लोगों पर एफआरएएस अटेंडेंस लागू कर दिया गया है. उन लोगों को काम के लिए नक्सल प्रभावित जंगली इलाके के गांव में भेजा जाता है. जहां आवागमन सहित तमाम तरह की असुविधाएं हैं. तीन टाइम की हाजिरी देने को कहा गया है. सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक क्षेत्र में रहकर काम करना हमारे लिए मुमकिन नहीं है. हम महिलाओं को नक्सल प्रभावित जंगली पहाड़ी इलाके से शाम पांच बजे के बाद काम से लौटना मुश्किल है. जहां काम के लिए हम जाते हैं, वहां पीने का पानी एवं शौचालय तक की व्यवस्था नहीं होती है. ऐसे में हम महिलाएं वहां शाम पांच बजे तक रहकर काम कैसे कर पायेंगे. कोई भी महिला शाम पांच बजे तक अटेंडेंस बनाकर वहां कैसे रहेगी. एफआरएएस नियम केवल एनएचएम कर्मियों पर ही लागू किया गया है. वेतन भोगी लोगों को इससे अलग रखा गया है. हमें समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिये. सरकार नियम में बदलाव करे और हमें समान काम के लिए समान वेतन दे.

सूर्यगढ़ा क्षेत्र में कार्यरत हैं कुल 19 सीएचओ

शिवानी जायसवाल ने बताया कि सूरतगढ़ प्रखंड में कार्यरत सभी 32 एएनएम-आर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गयी हैं. इधर सीएचओ भी एफआरएएस नियम लागू किये जाने के विरोध में सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गयी हैं. श्वेता कुमारी, स्वर्णिम स्नेही, जुली कुमारी, भावना कुमारी, मधुमिता कुमारी, संजना कुमारी, आरती कुमारी, सोनम कुमारी, गौरव कुमार, गोखलेश कुमार आदि ने बताया कि सूर्यगढ़ा क्षेत्र में कुल 19 सीएचओ कार्यरत हैं. हमने एफआरएएस नियम को लागू किये जाने के विरोध में हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है. हमें सुदूरवर्ती जंगली इलाके में ड्यूटी पर जाना पड़ता है. नक्सल प्रभावित इन इलाकों में शाम पांच बजे तक ड्यूटी कर लौटना संभव नहीं है. हमारी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है. इन दुर्गम इलाकों में आवागमन की भी काफी असुविधा है. प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि मामले को लेकर आवेदन दिया गया है. वरीय पदाधिकारी इसको स्थिति से अवगत करा दिया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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