जहां खाली हाथ नहीं लौटता कोई श्रद्धालु, जानिए लखीसराय के बेला महादेव धाम की मान्यता

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जहां खाली हाथ नहीं लौटता कोई श्रद्धालु, जानिए लखीसराय के बेला महादेव धाम की मान्यता

रामपुर गांव स्थित बाबा कामेश्वर नाथ उर्फ बेला महादेव मंदिर, जहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु

Aaj ka darshan: ग्रामीण सुलेन सिंह उर्फ इंद्रसेन, संजीव सिंह, शैलेंद्र वर्मा, पप्पू सिंह और राज कुमार झा बताते हैं कि यह शिवलिंग वर्षों तक खुले आसमान के नीचे विराजमान था. गिद्धौर राजघराने के शासनकाल से यहां पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है. ग्रामीणों के अनुसार उसी समय मंदिर के लिए भूमि भी दान में दी गई थी.

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खुले आसमान के नीचे विराजमान थे बाबा कामेश्वर नाथ, मन्नतें पूरी होने पर बना भव्य मंदिर

चानन (लखीसराय) से रंजन पासवान की रिपोर्ट:

Aaj ka darshan: चानन थाना क्षेत्र के रामपुर गांव स्थित बाबा कामेश्वर नाथ उर्फ बेला महादेव मंदिर आस्था, विश्वास और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है. स्थानीय लोगों के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है और इसकी महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है. मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा के दरबार में मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.

वर्षों तक खुले आसमान के नीचे विराजमान रहे बाबा

ग्रामीण सुलेन सिंह उर्फ इंद्रसेन, संजीव सिंह, शैलेंद्र वर्मा, पप्पू सिंह और राज कुमार झा बताते हैं कि यह शिवलिंग वर्षों तक खुले आसमान के नीचे विराजमान था. गिद्धौर राजघराने के शासनकाल से यहां पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है. ग्रामीणों के अनुसार उसी समय मंदिर के लिए भूमि भी दान में दी गई थी.

मन्नत पूरी होने पर कराया गया मंदिर निर्माण

ग्रामीणों के मुताबिक मननपुर बाजार निवासी बाबूलाल मोदी की बहन संतान सुख से वंचित थीं. लोगों की सलाह पर उन्होंने बाबा कामेश्वर नाथ की पूजा-अर्चना की. मान्यता है कि बाबा के आशीर्वाद से उनकी मनोकामना पूरी हुई और उन्हें संतान सुख प्राप्त हुआ. इसके बाद बाबूलाल मोदी ने श्रद्धा स्वरूप मंदिर का निर्माण कराया.

इसी प्रकार रामपुर निवासी रामवरण सिंह की पुत्रवधू बेबी देवी ने भी अपनी मनोकामना लेकर बाबा के दरबार में माथा टेका था. मन्नत पूरी होने के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में माता पार्वती का मंदिर बनवाया.

सावन में लगता है भक्तों का मेला

बेला महादेव मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन माह में यहां विशेष रौनक देखने को मिलती है. प्रत्येक सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. दूर-दराज के गांवों और जिलों से भी भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं.

आस्था और विश्वास का केंद्र बना मंदिर

ग्रामीणों का कहना है कि बाबा कामेश्वर नाथ के दरबार से आज तक कोई श्रद्धालु निराश नहीं लौटा. मन्नत पूरी होने पर लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर के विकास में सहयोग करते हैं. यही कारण है कि आज यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक पहचान बन चुका है और प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं.

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Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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