पहले की होली में सुलझ जाता था कई लोगों का आपसी विवाद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :11 Mar 2017 5:39 AM (IST)
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सूर्यगढ़ा : 13 को रंगों का त्योहार होली मनाया जायेगा. सभी जगहों पर होली की मस्ती छाने लगी है. सड़कों पर लोग अबीर गुलाल लगाये नजर आ रहे हैं. बाजारों में भी होली को लेकर चहल-पहल है. हाल के वर्षों में होली मनाने के तौर तरीके में बदलाव आया है. शुक्रवार को प्रभात खबर प्रतिनिधि […]
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सूर्यगढ़ा : 13 को रंगों का त्योहार होली मनाया जायेगा. सभी जगहों पर होली की मस्ती छाने लगी है. सड़कों पर लोग अबीर गुलाल लगाये नजर आ रहे हैं. बाजारों में भी होली को लेकर चहल-पहल है. हाल के वर्षों में होली मनाने के तौर तरीके में बदलाव आया है. शुक्रवार को प्रभात खबर प्रतिनिधि ने लोगों से जानना चाहा कि पहले और आज की होली में क्या फर्क महसूस करते हैं.
क्या कहते हैं लोग
पहले होली में शालीनता दिखती थी जो अब कम ही देखने को मिलती है. बड़े बुजुर्ग का जो सम्मान था उसमें व्यापक कमी आयी है जो सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं है. पहले होली का हुड़दंग भी आनंद देता था लेकिन अब होली का हुड़दंग दुखदायी होता है. पहले के होली में हंसी मजाक कई लोगों के विवाद को सुलझाने का कारगार कदम होता था.
रविशंकर सिंह अशोक, अध्यक्ष मुंगेर चेंबर ऑफ कॉमर्स सूर्यगढ़ा इकाई
पहले होली को प्रह्लाद की भक्ति को प्रदर्शित करते हुए मनाते थे. इसमें अधर्म पर धर्म की जीत को दिखाया जाता था. लोग खुशी मनाते थे. बड़ों का पैर छू कर आशीर्वाद लेते थे लेकिन आज के समय होली केवल दिखावा हो गया है. लोग बुजुर्ग से आशीर्वाद लेना तो दूर उन्हें पूछते तक नहीं.
अनंत कुमार आनंद, मुखिया किरणपुर पंचायत
पहले होली में टोले-मुहल्ले में चौपाल लगती थी सभी लोग पांरपरिक वाद्ययंत्र, झाल, मजीरा आदि के साथ जोगिरा गाते थे. किसी के साथ भेदभाव नहीं होता था लेकिन अब होली में आपसी भाईचारा कहीं गुम हो गयी है. होली को बदरंग करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाती. पर्व नशीले पदार्थों के सेवन का बहाना बन गया है.
अनिल वर्मा, व्यवसायी
होली आज भी सद्भावना का त्योहार है लेकिन सद्भावना के बीच में अब न वह होली रही और न ही ठिठोली रही. पहले सप्ताह भर पूर्व से लोगों में होली का खुमार चढ़ना शुरू हो जाता था. जाति-धर्म से ऊपर उठकर लोग प्रेम-चारे के साथ एक साथ मिलकर होली मनाते हैं. अब ऐसी बात नहीं रही. लोग होली के दिन भी घर से नहीं निकलते हैं.
प्रेम कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता
अब होली में सद्भावना कम और कड़वाहट ज्यादा देखने को मिलती है. इक्के-दुक्के लोगों के कारण समाज के सभी लोग परेशान होते हैं. सहिष्णुता व भाईचारा दिखाई नहीं देता. आज होली में न तो वह मस्ती रही और न ही उल्लास. लोग एक दूसरे से परहेज करने लगे हैं.
विमल वर्मा, व्यवसायी
होली में करोड़ों का होगा कारोबार
सूर्यगढ़ा. होली की उमंग में हरेक क्षेत्र डूब चुका है. बाजारों में भी रंग, गुलाल, पिचकारी, मेवा, खाद्यान्न, कपड़ा आदि की बिक्री बढ़ गयी है. शुक्रवार को मौसम खराब रहने व हल्की बूंदा-बांदी के बावजूद बाजार में खरीदारों की भीड़ रही. होलास्टक में भी इस साल लगन होने की वजह से रंगोत्सव के इस पावन पर्व में रंग गुलाल के साथ शहनाई की गूंज भी सुनायी दे रही है. चिकन, मटन बाजार में भी बिक्री बढ़ने लगी है. बाजार में रंग गुलाल के साथ विभिन्न तरह का मुखौला व टेक पिचकारी का क्रेज है. शेर, चीता, भूत, पिशाच, राक्षस आदि वाला मुखौटा बच्चे खरीद हैं. होली में मनोरंजन के साथ त्योहार मनाया जाता है. इसमें विभिन्न तरह का मुखौटा देख बच्चे खुश होते हैं. होली में सूर्यगढ़ा में लगभग दो करोड़ का कारोबार होने की संभावना है.
होली में लाखों का बिकेगा मटन : इस बार होली में लाखों के मटन व चिकन की बिक्री होने की संभावना है. चिकन कारोबारी का कहना है कि अभी खड़ा चिकन 120 रुपये किलो व मटन 450-500 रुपये प्रति किलो बिक रहा है.
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