लस्सी-शरबत पीयें पर रहें सावधान

Published at :14 Apr 2016 4:00 AM (IST)
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लस्सी-शरबत पीयें पर रहें सावधान

दूषित पानी में बने शीतल पेय नुकसानदेह लखीसराय : गरमी बढ़ने के साथ शीतल पेय की दुकानों पर भीड़ देखी जा रही है. ये शीतल पेय सेहत के लिये फायदेमंद तो है, लेकिन इनसे सावधान रहने की भी जरूरत है. लेकिन इनसे सावधान रहने की भी जरूरत है. साफ-सफाई नहीं रहने के कारण शीतल पेय […]

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दूषित पानी में बने शीतल पेय नुकसानदेह

लखीसराय : गरमी बढ़ने के साथ शीतल पेय की दुकानों पर भीड़ देखी जा रही है. ये शीतल पेय सेहत के लिये फायदेमंद तो है, लेकिन इनसे सावधान रहने की भी जरूरत है. लेकिन इनसे सावधान रहने की भी जरूरत है. साफ-सफाई नहीं रहने के कारण शीतल पेय लोगों की सेहत के लिये नुकसानदेह भी हो सकते हैं.
इन्हें पीने से पहले ध्यान देने की जरूरत है कि दुकानों पर साफ-सफाई का कितना ख्याल रखा जाता है. कहीं दुकानदार-सड़े-गले फल तो इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. कैसे पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं? दूध व दही ढ़क कर रखे गये हैं या नहीं. बनो वाले के नाखून साफ हैं या नहीं. दुकानदार ने दस्ताना पहना है या नहीं, अगर नहीं , तो लोग जाने-अनजाने में वायुमंडल में घूम रहे बैक्टीरिया के साथ-साथ कीटाणु-जीवाणु व कीड़ों का सेवन कर रहे हैं. बीमारियों को न्योता दे रहे हैं.
साफ-सफाई का ख्याल नहीं
गरमी का मौसम शुरू होते ही कड़ी धूप व भीषण गरमी से राहत देने के लिये शहर के प्रमुख चौक -चौराहों व सड़कों पर लस्सी, बेल का शरबत, आम रस, अमझोरा, ठंठई व सत्तू जैसे शीतल पेय की दुकानें सज गयी हैं. ये शीतल पेय गरमी से बेहाल लोगों को थोड़ी देर के लिये राहत जरूर देते हैं. लेकिन, साफ सफाई नहीं होने से ये नुकसानदायक भी हो सकते हैं.
डाकघर के समीप जूस दुकान संचालित करने वाले संजीव कुमार के मुताबिक हर साल गरमी के आते ही शीतल पेय की दुकान लगाता हूं. फल मंडी से अच्छी क्वालिटी का फल लाता हूं. उन्हें धोकर रखता हूं. दिन भर में 15-20 बार फलों व कांउटर की सफाई करता हूं. चापाकल का पानी इस्तेमाल करता हूं. जूसर मशीन का बार-बार साफ करता हूं. हाथ में दस्ताना नहीं होता. ग्राहकों के हमेशा आते-जाते रहने के कारण फल को ढ़क कर रखना मुश्किल होता है.
सूर्यगढ़ा में बाजार लस्सी की दुकान लस्सी की दुकान लगाने वाला शंकर के मुताबिक हर दिन सात-आठ सौ गिलास लस्सी बिक जाती है. शीशे के गिलास के साथ-साथ प्लास्टिक का गिलास भी ग्राहकों की मांग पर रखा है. चापाकल का पानी इस्तेमाल करता हूं. शाम होते ही जब बत्ती जलती है, तो कीड़े मंडराने लगते हैं. सड़क किनारे दुकान होने के कारण गाडि़यों के आने जाने से धूल उड़ती रहती है. दूध-दही को ढ़क कर रखता हूं. पर ग्राहकों की जल्दबाजी के आग फेल हो जाता है.
ऐसे में कभी-कभी कीड़े व मक्खियां भी लस्सी के अंद चले जाते हैं, जिसे बार-बार हटना पड़ता है. दही मथते समय दस्ताना का इस्तेमाल नहीं करता हूं.
शीतल पेय बनाने में स्वच्छता जरूरी
इस बाबत फिजिशियन डा उपेंद्र सिंह ने बताया कि गरमी के दिनों में तरल पदार्थ स्वास्थ्य के लिये काफी उपयोगी होते हैं, लेकिन यह जरूरी है कि वह कैसे वातावरण व वह किस स्थान पर कितनी स्वच्छता से बनाया जा रहा है. अगर ऐसा नहीं है, तो वह स्वास्थ्य के लिये काफी नुकसानदेह है.
बीमारी को दावत देने वाला है. बाजार में शीतल पेय बनाने के लिये अक्सर सप्लाई वाटर व दूषित चापाकल का पानी इस्तेमाल किया जाता है. फलों पर मक्खिायां भिनभिनाती रहती है. खुले में होने के कारण शीतल पेय व फल धूल व बैक्टीरिया से संक्रमित होते रहते हैं. इससे डायरिया पेट संबंधित बीमारियां होने का खतरा बना रहता है.
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