परेशानी. गरमी आते ही पशु चारा व पानी की बढ़ गयी किल्लत
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Apr 2016 2:44 AM (IST)
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पशुपालक कर रहे पलायन गरमी शुरू होते ही जिले के पहाड़ी क्षेत्रों के साथ हलसी, रामगढ़चौक आदि प्रखंड में पशु चारा की किल्लत शुरू हो गयी है. इससे हर वर्ष की तरह पशुपालक चारा-पानी की तलाश में पशुओं के साथ क्षेत्र से पलायन करने लगे हैं. ढाई से तीन माह के प्रवास के बाद मानसून […]
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पशुपालक कर रहे पलायन
गरमी शुरू होते ही जिले के पहाड़ी क्षेत्रों के साथ हलसी, रामगढ़चौक आदि प्रखंड में पशु चारा की किल्लत शुरू हो गयी है. इससे हर वर्ष की तरह पशुपालक चारा-पानी की तलाश में पशुओं के साथ क्षेत्र से पलायन करने लगे हैं. ढाई से तीन माह के प्रवास के बाद मानसून आने पर वे पशुओं को लेकर घर लौटेंगे.
लखीसराय : गरमी शुरू होते ही भूमिगत जलस्तर में गिरावट के कारण जिले भर में जल संकट गहराने लगा है. पहाड़ी इलाके में स्थिति और भी गंभीर होने लगी है. पशुपालकों के समक्ष पानी के अलावे चारा का संकट उत्पन्न हो रहा है. इससे पशुपालक अपने मवेशी के साथ चारा व पानी की खोज में अन्यत्र पलायन कर रहे हैं. चानन के पशुपालक किशोर यादव, भकुटी यादव आदि ने बताया कि हर साल उन्हें गरमी शुरू होते ही मवेशी के साथ पलायन करना पड़ता है.
चारा-पानी की खोज में मीलों दूर भटकना पड़ता है. अक्सर पशुपालक खगडि़या से आगे फरकिया में मवेशी के साथ डेरा डालते हैं, क्योंकि गरमी के मौसम में इन इलाकों में पशुओं के लिए चारा-पानी उपलब्ध हो जाता है. मानसून आने के बाद ही वे मवेशी के साथ घर लौट पाते हैं. हलसी के पशुपालक अवधेश राम के मुताबिक उन्हें लगभग ढाई या तीन महीना पशुओं के चारा-पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है, जहां चारा व पानी उपलब्ध होता है, वहीं महीनों मवेशी के साथ डेरा डाल देते हैं. अक्सर पचास से सौ किलोमीटर तक चारा-पानी की तलाश में भटकना पड़ता है.
पशुपालकों के मुताबिक इस वर्ष गरमी के तेवर तल्ख हैं. सभी जगहों पर भूमिगत जल स्तर काफी नीचे जा रहा है. ऐसे में परेशानी और बढ़ने की संभावना है. पिपरीया प्रखंड के रामचंद्रपुर पंचायत के पशुपालक सह किसान बुलबुल कुमार सिंह, सुनील कुमार सिंह, दारा सिंह, परशुराम सिंह, अजय सिंह सहित दर्जनों किसानों ने बताया कि इस बार बारिश नहीं होने के कारण नदी व ढाब में पानी बिल्कुल नहीं है.
वहीं बारिश नहीं होने से जंगल में भी घास एवं हरियाली उपलब्ध नहीं हो पा रही है. अभी-अभी फसलों की कटाई प्रारंभ हुई है. इस कारण भूसा भी तैयार नहीं हो पाया है. इसलिए हम लोग अपने पशुओं को बेगूसराय जिले के सिंहमा दियारा भेज देते हैं और वहां से फिर जिस-जिस जगह पानी की उपलब्धता एवं हरियाली प्रचुर मात्रा में रहती है. वहीं पर लगभग एक महीना तक रह कर अपने पशुओं की जान बचाते हैं .
कजरा प्रतिनिधि के अनुसार उरैन पंचायत के बसुहार, नवकाडीह, पुनाडीह, चंपानगर आदि गांव के पशुपालक क्षेत्र में सूखे तालाब, झुलसे घास व पौधे के किल्लत से गरमी की शुरूआत में ही अपने अपने मवेशियों को लेकर खगडि़या जिले के फरकिया गंगा तट पर जाने को मजबूर हो जाते हैं. पशुपालक मिट्ठु यादव, चंद्रशंखर यादव, अनिक यादव आदि ने बताया कि वर्षों से इस क्षेत्र के पशुपालक चारे एवं पानी के अभाव के चलते गरमी में अपने पशु के साथ पलायन करने को मजबूर हैं. वहीं वर्षा ऋतु के प्रारंभ होने पर वापस अपने क्षेत्र चले आते हैं.
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