महिला प्रतिनिधियों को नहीं चाहिए पुरुषों की वैशाखी

Published at :04 Dec 2015 6:42 PM (IST)
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महिला प्रतिनिधियों को नहीं चाहिए पुरुषों की वैशाखी

महिला प्रतिनिधियों को नहीं चाहिए पुरुषों की वैशाखी फोटो संख्या:02चित्र परिचय-प्रखंड कार्यालय में अपनी आवाज बुलंद करने पहुंची महिलाएंप्रतिनिधि, मेदनीचौकीत्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिलने के बाद प्रखंड क्षेत्र में महिलाएं उभरकर सामने आयी हैं. प्रखंड के कुल 28 पंचायतों में से 14 पंचायतों में महिला मुखिया व सरपंच विकास का […]

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महिला प्रतिनिधियों को नहीं चाहिए पुरुषों की वैशाखी फोटो संख्या:02चित्र परिचय-प्रखंड कार्यालय में अपनी आवाज बुलंद करने पहुंची महिलाएंप्रतिनिधि, मेदनीचौकीत्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिलने के बाद प्रखंड क्षेत्र में महिलाएं उभरकर सामने आयी हैं. प्रखंड के कुल 28 पंचायतों में से 14 पंचायतों में महिला मुखिया व सरपंच विकास का परचम लहरा रही हैं. जबकि कुल 38 में से 19 पंचायत समिति सदस्य व चार में से दो जिला परिसद सीट पर महिलाएं चुनकर आयी हैं. जिनसे विकास कार्यों में उनकी भागीदारी बढ़ी हैं. प्रखंड प्रमुख नीता देवी ने पंचायत समिति की बैठक में जमकर अपनी आवाज बुलंद की. इन महिला प्रतिनिधियों में राजनैतिक चेतना का विकास हुआ है. वहीं शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण के कारण सैकड़ों की तादाद में महिला शिक्षकों का नियोजन हुआ. आंगनबाड़ी केंद्रों में सेविका-सहायिका के अलावा बालदीदी, आशा, ममता आदि के रूप में महिलाओं को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा गया. ताजपुर पंचायत की मुखिया प्रेमा कुमारी के मुताबिक महिलाओं के उत्थान के लिए मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना, छात्रवृत्ति, साइकिल, कन्या विवाह आदि योजनाओं का लाभ मुहैया कराया जा रहा है. लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत विधवाओं को लाभ दिया गया. जिससे सामाजिक स्तर पर महिलाओं की प्रतिष्ठा बढ़ी. प्रखंड कार्यालय में अपने हक के लिए महिलाएं खुद आने लगी. वे अपनी समस्याएं अब खुद उठाने लगी हैं. अब वह पुरुष नेतृत्व की मुहताज नहीं रही. महिला मुखिया के पति या पुत्र जबरन उनके अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं. यदि महिलाओं को बढ़ावा दिया जाय, उन्हें उनका हक दिया जाय तो पंचायत में कम से कम महिलाओं पर हो रहे अत्याचार में गुणात्मक कमी आयेगी. प्रखंड प्रमुख नीता देवी के मुताबिक महिला मुखिया यदि खुद योजनाओं का क्रियान्वयन करावे तो काम में गुणवत्ता जरूर दिखेगा. उसी तरह यदि महिला सरपंच खुद विवादों का फैसला करे तो लोगों को सही न्याय मिल सकेगा. क्षेत्र की दर्जनों छात्राएं उच्च तकनीकी शिक्षा प्रबंधन, कम्प्यूटर आदि क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं. महिला पर बढ़ते अत्याचार के खिलाफ निर्मला देवी, सुमित्रा देवी, सुशीला देवी आदि के नेतृत्व में संघर्ष जारी है.

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