सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा कर्मचारी विरोधी : विकास

Published at :04 Dec 2015 6:42 PM (IST)
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सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा कर्मचारी विरोधी : विकास

सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा कर्मचारी विरोधी : विकास फोटो सेख्या:01चित्र परिचय-विकास कुमार का फाइल फोटोप्रतिनिधि, लखीसरायकेंद्रीय सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा घोर कर्मचारी विरोधी व सामंती व्यवस्था की ओर ले जाने वाला है. अगर इस अनुशंसा को वर्तमान प्रारूप के मुताबिक लागू किया गया तो देश में श्रमिकों को मिलने वाला वार्षिक वेतन वृद्धि, […]

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सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा कर्मचारी विरोधी : विकास फोटो सेख्या:01चित्र परिचय-विकास कुमार का फाइल फोटोप्रतिनिधि, लखीसरायकेंद्रीय सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा घोर कर्मचारी विरोधी व सामंती व्यवस्था की ओर ले जाने वाला है. अगर इस अनुशंसा को वर्तमान प्रारूप के मुताबिक लागू किया गया तो देश में श्रमिकों को मिलने वाला वार्षिक वेतन वृद्धि, प्रोन्नति व सेवा खतरे में पड़ सकता है. उक्त बातें बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ(सेवांजलि) के उप महामंत्री विकास कुमार ने एक विज्ञप्ति जारी कर कही. उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग ने अपनी अनुशंसा में पूर्व से प्रचलित चार वेतन बैंडों व 16 ग्रेड पे को समाप्त करने की सिफारिश की है. एक जनवरी 2006 से लागू पीबी-01 को 2.57, पीबी-02 को 2.62, पीबी-03 को 2.67 एवं पीबी-04 के लिये 2.57 व उच्च स्तरीय वेतनमान 67 हजार से 79 हजार के लिये 2.72 प्रतिशत गुणक के फार्मूले से गणना की है. आयोग द्वारा वेतन बैंडों के लिये अलग-अलग प्रतिशत निर्धारित करने के कारण जहां न्यूनतम वेतन एक जनवरी 2016 से 18 हजार रुपया निर्धारित होगा. वहीं अधिकतम दो लाख 25 हजार रुपया वेतन निर्धारण में भी भेदभाव किया गया है. निर्धारित मापदंड के अनुसार जहां न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपया होनी चाहिये, वहां सिर्फ 18 हजार रुपया देने की अनुशंसा कर दी गयी. सरकारी कर्मचारियों को 03 प्रतिशत वेतन वृद्धि की अनुशंसा की गयी है, किंतु उसमें भी यह शर्त जोड़ा गया कि दूसरा लाभ वैसे कर्मी को ही दिया जाय जिनका परफोरमेंस बहुत ही अच्छा हो. इस मामले में आयोग द्वारा 20 वर्षों से अधिक सेवा पूर्ण करने वाले कर्मचारियों के मामले में खतरनाक अनुशंसा की गयी है और सुझाव दिया गया है. वैसे सरकारी कर्मचारी जिन्होंने 20 वर्षों से अधिक की सेवा पूर्ण कर ली है और उनका परफोरमेंस बहुत अच्छा नहीं रहा तो उन्हें सेवानिवृत्त करा दिया जाय. नियमित प्रोन्नति, एसीपी व एमएसीपी के मामलों में भी परफॉरमेंस आधारित व्यवस्था करने की अनुशंसा की गयी है. आयोग के इस प्रकार की अनुशंसा से देश में अफसरशाही का बोलबाला हो जायेगा. जो कर्मी चापलूस किस्म के होंगे उन्हें ही वेतन वृद्धि, प्रोन्नति व सेवा में रहने का अवसर मिलेगा. ईमानदारीपूर्वक निष्पक्ष रूप से कार्य करने वाले कर्मियों को सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा. बिहार राज्य कर्मचारी महासंघ (सेवांजलि)सातवें वेतन आयोग की कर्मचारी विरोधी अनुशंसा को रद्द करने के लिये सतत संघर्षशील रहेगा.

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