अस्पताल कर्मियों के कार्यकलाप से ग्रामीण हैं क्षुब्ध

Updated at :04 Nov 2015 6:41 PM
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अस्पताल कर्मियों  के कार्यकलाप से ग्रामीण हैं क्षुब्ध

अस्पताल कर्मियों के कार्यकलाप से ग्रामीण हैं क्षुब्ध चिकित्सक पर आरोप लगते हुए कहा कि प्राथमिक उपचार होता तो बच सकती थी जानसोनो . स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों पर ग्रामीणों द्वारा लगाये गए लापरवाही का आरोप यह दर्शाने के लिए काफी हैं कि स्वास्थ्य विभाग मरीजो के प्रति कितना संवेदनहीन […]

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अस्पताल कर्मियों के कार्यकलाप से ग्रामीण हैं क्षुब्ध चिकित्सक पर आरोप लगते हुए कहा कि प्राथमिक उपचार होता तो बच सकती थी जानसोनो . स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों पर ग्रामीणों द्वारा लगाये गए लापरवाही का आरोप यह दर्शाने के लिए काफी हैं कि स्वास्थ्य विभाग मरीजो के प्रति कितना संवेदनहीन है़ स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि मंगलवार को विद्युत स्पर्शाघात के शिकार गोपाल गुप्ता व उसकी पत्नी शांति को यदि स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में समुचित चिकित्सीय सुविधा मिलती तो शायद आज दोनों जीवित होते और चार अबोध बच्चों के सिर से माता पिता का साया नहीं हटता़ मरीज के साथ अस्पताल गए प्रेम शंकर, राजीव कुमार सिंह, राकेश भगत, प्रदीप गुप्ता, अजय गुप्ता, सिंटू कुमार, प्रवीण कुमार आदि बताते हैं कि उस वक्त ड्यूटी कर रहे चिकित्सक डा. विवेक कुमार मरीजो का प्राथमिक उपचार भी नहीं किये बल्कि बिना जांच किये जमुई भेज दिया़ यहां यह प्रश्न उठना लाजिमी ही है कि आखिर जीवन बचाने का प्रयास क्यों नही किया गया़ ग्रामीण आक्रोश व्यक्त करते हुए कहते हैं कि ऐसे संवेदहीन चिकित्सक पर कठोर-से-कठोर कार्रवाई किये जाने की आवश्यकता है.जिससे अन्य लोगों को भी अपने कर्तव्य का ध्यान रह सके .ग्रामीण बताते हैं कि सदर अस्पताल में दंपति की जांच करते हुए जब चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित किया तो उन्होंने भी इस बात पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा की यदि समय पर मरीज को सुई व आक्सीजन दिया जाता तो शायद जान बच सकती थी़ हालांकि ग्रामीणों से प्राप्त शिकायती आवेदन के आलोक में सीएस ने कार्रवाई करते हुए उक्त चिकित्सक को सोनो पीएचसी से हटा दिया गया है परंतु मृतक परिजन व पड़ोसियों को यह टीस सदैव रहेंगी कि अस्पताल प्रबंधन की निष्ठुरता के वे लोग शिकार हुए . लोग मानते हैं कि अस्पताल प्रबंधन को इस घटना से सबक लेकर सरकार के उस प्रयास को सकारात्मक रूप देने का प्रयास करना होगा. जिसके लिये अस्पताल बनाया गया़

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