सही उपचार से टीबी का इलाज है संभव

Updated at : 21 Feb 2020 6:23 AM (IST)
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सही उपचार से टीबी का इलाज है संभव

लखीसराय : अब जिले में आम लोगों को जागरूक करने में आयुष चिकित्सक भी सहयोग करेंगे. इसके लिए उन्हें जिला टीबी विभाग द्वारा प्रशिक्षण प्रदान कराया जायेगा. इसको लेकर सिविल सर्जन डॉ सुरेश शरण ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पत्र लिखकर जानकारी दी है. उन्होंने पत्र के माध्यम से बताया […]

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लखीसराय : अब जिले में आम लोगों को जागरूक करने में आयुष चिकित्सक भी सहयोग करेंगे. इसके लिए उन्हें जिला टीबी विभाग द्वारा प्रशिक्षण प्रदान कराया जायेगा. इसको लेकर सिविल सर्जन डॉ सुरेश शरण ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पत्र लिखकर जानकारी दी है.

उन्होंने पत्र के माध्यम से बताया है कि जिला सदर अस्पताल के सभागार कक्ष मे शनिवार को जिले में टीबी पर जागरूकता एवं उनके बेहतर इलाज के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन होगा. उन्हें इस प्रशिक्षण के द्वारा क्षय रोग उन्मूलन के लिए सामुदायिक जागरूकता, क्षय रोग के विषय में सटीक एवं संपूर्ण जानकारी एवं टीबी से बचाव एवं उपचार के लिए जिला क्षय रोग विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं पर विस्तार से जानकारी दी जायेगी.
इलाज के दौरान पोषण राशि का प्रावधान : जिले के गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ पीसी वर्मा ने बताया टीबी के मरीजों को बेहतर इलाज के साथ प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान कराया गया है, जिसमें प्रति मरीज प्रति माह उनके बेहतर पोषण के लिए 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. टीबी बैक्टीरिया से होने वाले रोग जिसका समुचित इलाज संभव है. इसके लिए जिला टीबी विभाग निरंतर कार्य कर रहा है.
जिले के चिह्नित इलाकों के संभावित मरीजों के नमूने की भी जांच की जाती है. पॉजिटिव केस आने पर उन्हें विभाग की तरफ़ से निःशुल्क दवा भी दी जाती है. यदि दवा का सही डोज लिया जाोतब मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकता है. केंद्र सरकार ने राज्य के साथ पूरे देश से वर्ष 2025 तक टीबी का सफाया करने का लक्ष्य रखा है.
जाने रोग को: टीबी आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है. सबसे कॉमन फेफड़ों की टीबी ही है. लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीरके किसी भी हिस्से में हो सकती है. टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिये फैलता है. खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वालीं बारीक बूंदों सेयह इंफेक्शन फैलता है.
दो हफ्ते से ज्यादा लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम का आना, कभी-कभी बलगम के साथ खून का आना, भूख कम लगना, लगातार वजन कम होना, शाम या रात के वक्त बुखार आना, सर्दी में भी पसीना आना, सांस उखड़ना या सांस लेते हुए सीने में दर्द होना इत्यादि टीबी के लक्ष्ण हो सकते हैं. ऐसे लक्ष्ण दिखाई देने पर मरीज को सरकारी अस्पताल आकर बलगम की जांच जरुर करानी चाहिए. टीबी लाईलाज रोग नहीं है. इसका सम्पूर्ण निःशुल्क ईलाज सरकारी अस्पतालों पर उपलब्ध है.
दवाओं के पूरे डोज नहीं लेने से एमडीआर का खतरा : टीबी का इलाज पूरी तरह मुमकिन है. सरकारी अस्पतालों और डॉट्स सेंटरों मेंइसका फ्री इलाज होता है. टीबी से ग्रसित मरीज़ों द्वारा टीबी के दवा का पूरा कोर्स नहीं करने के कारण एमडीआरटीबी होने का खतरा बढ़ जाता है.
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