आत्मा का प्रकाश अनमोल, ध्यान ही सच्चे धन का मार्ग: स्वामी व्यासानंद जी महाराज

Updated at : 23 Mar 2026 6:56 PM (IST)
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आत्मा का प्रकाश अनमोल, ध्यान ही सच्चे धन का मार्ग: स्वामी व्यासानंद जी महाराज

टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय कुंवारी मैदान में आयोजित दो दिवसीय आध्यात्मिक संतमत सत्संग का आयोजन सोमवार को हुआ

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किशनगंज टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय कुंवारी मैदान में आयोजित दो दिवसीय आध्यात्मिक संतमत सत्संग का आयोजन सोमवार को हुआ. हरिद्वार से पधारे परम पूज्य स्वामी व्यासानंद जी महाराज के प्रेरणादायी प्रवचनों को सुनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे और पूरे वातावरण में भक्ति की गूंज सुनाई देती रही. अपने संबोधन में स्वामी व्यासानंद जी महाराज ने आत्मा के महत्व को विस्तार से समझाते हुए कहा कि आत्मा का प्रकाश अनमोल है, जिसे किसी भी सांसारिक वस्तु से प्राप्त नहीं किया जा सकता. ध्यान ही सच्चे धन का मार्ग है. आत्मा धरोहर प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान है, बस आवश्यकता है उसे पहचानने और जागृत करने की. उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य बाहरी दुनिया में सुख-सुविधाओं और भौतिक संपत्ति की तलाश में भटक रहा है, जबकि वास्तविक शांति और सच्चा धन उसके भीतर ही छिपा हुआ है. स्वामी जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र अपने भीतर असीम गहराई और अनगिनत गुणों को समेटे रहता है, उसी प्रकार मनुष्य की आत्मा भी अनंत शक्तियों और गुणों से परिपूर्ण है. यदि व्यक्ति अपने भीतर झांकना सीख ले और आत्मचिंतन का अभ्यास करे, तो वह अपने जीवन में सच्ची शांति और संतोष प्राप्त कर सकता है. उन्होंने विशेष रूप से ध्यान साधना को संतमत का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि ध्यान के माध्यम से ही व्यक्ति अपने भीतर के दिव्य प्रकाश का साक्षात्कार कर सकता है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आप अपनी आत्मा के प्रकाश को पूरी सृष्टि बेचकर भी नहीं खरीद सकते. यह ईश्वर की अनमोल देन है, जो हर व्यक्ति को जन्म से ही प्राप्त होती है. उनके इन विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया और लोगों को आत्मिक जीवन की ओर प्रेरित किया. प्रातःकालीन सत्संग के दौरान महिला एवं पुरुष श्रद्धालु शांतिपूर्वक बैठकर ध्यानमग्न अवस्था में स्वामी जी के प्रवचनों को सुनते नजर आए. पूरे परिसर में अनुशासन, शांति और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला. प्रवचन के दौरान कई श्रद्धालु भावविभोर होकर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते दिखे. आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस दो दिवसीय महा अधिवेशन में श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है. सभी के लिए महाप्रसाद की समुचित व्यवस्था की गई है, वहीं दूर-दराज से आने वाले भक्तों के ठहरने, स्नान और शौचालय की भी पर्याप्त और व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध कराई गई है. आयोजन स्थल पर स्वच्छता और सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. इस महा अधिवेशन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है. आसपास के गांवों के अलावा अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को नैतिक मूल्यों की ओर प्रेरित करते हैं. स्वामी व्यासानंद जी महाराज के प्रवचनों ने न केवल श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति का मार्ग दिखाया, बल्कि जीवन को सार्थक और संतुलित बनाने का संदेश भी दिया. यह महा अधिवेशन श्रद्धालुओं के लिए एक आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनकर उभरा है, जिससे समाज में सद्भाव, प्रेम और आत्मचेतना को नई दिशा मिल रही है.

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