झारखंड में चैती छठ की धूम: खरना के साथ शुरू हुआ महाव्रत, कल अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जायेगा पहला अर्घ

Updated at : 23 Mar 2026 8:38 PM (IST)
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Chaiti Chhath Puja

पूजा में शामिल छठ व्रती

Chaiti Chhath Puja: झारखंड में विधिवत खरना का अनुष्ठान संपन्न हो गया है, अब 36 घंटे के निर्जला व्रत पर हैं श्रद्धालु. मंगलवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्पित होगा अर्घ. पंडित दिलीप कुमार मिश्रा से जानें पूजा का विशेष महत्व और सूर्य देव के 12 नामों का फल.

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Chaiti Chhath Puja, रांची (राजकुमार लाल की रिपोेर्ट): झारखंड में चैती छठ महापर्व के दूसरे दिन सोमवार को खरना का अनुष्ठान पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ. व्रत रखने वाले लोगों ने दिन भर कुछ नहीं खाया, फिर शाम को पूजा की और भगवान सूर्य को भोग चढ़ाया. इसके बाद खीर, रोटी और अन्य प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू किया गया.

खरना पर प्रसाद और पूजा का विशेष महत्व

व्रतियों ने दोपहर बाद से ही खीर-रोटी सहित विभिन्न तरह के प्रसाद तैयार करना शुरू कर दिया था. सूर्यास्त के बाद विधिवत पूजा-अर्चना कर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की गयी. पूजा के बाद प्रसाद का वितरण किया गया, जिसे ग्रहण करने के साथ ही कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत हो गयी.

आज अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ

महापर्व के तीसरे दिन मंगलवार को अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ अर्पित किया जाएगा. व्रती सुबह स्नान-ध्यान के बाद प्रसाद तैयार करेंगी और दोपहर बाद अर्घ की टोकरी व सूप सजायेंगी. लोकगीतों के मधुर स्वर के बीच शाम करीब चार बजे छठ घाट के लिए प्रस्थान करेंगी, जहां डूबते सूर्य को अर्घ दिया जायेगा.

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घाटों से लेकर घरों तक तैयारी

अर्घ देने के लिए श्रद्धालु नदी, तालाब और डैम जैसे जल स्रोतों की ओर रुख करेंगे. वहीं कई लोग अपने घरों के पास बनाये गये कृत्रिम तालाबों या बड़े टब में भी अर्घ देने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे हर कोई इस महापर्व में शामिल हो सके.

उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ के साथ होगा समापन

बुधवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ देने के बाद पूजा-अर्चना और हवन किया जायेगा. इसके साथ ही प्रसाद वितरण कर चैती छठ महापर्व का समापन होगा,

विशेष फल के लिए मंत्रोच्चार का महत्व

पंडित दिलीप कुमार मिश्रा के अनुसार, भगवान सूर्य को उनके बारह नामों से अर्घ देने और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

लोकगीतों से गूंजा माहौल

छठ महापर्व के दौरान पारंपरिक लोकगीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया है. लोग “पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहार…” और “ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से…” जैसे गीतों के साथ श्रद्धालु छठी मईया और भगवान सूर्य की आराधना में लीन हैं. पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर हो उठा है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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