अपर समाहर्ता ने लाभुकों के बीच बांटे 1.81 करोड़ के ऋण

अपर समाहर्ता ने लाभुकों के बीच बांटे 1.81 करोड़ के ऋण
पीएमईजीपी, पीएमएफएमई व पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत युवाओं व कारीगरों को मिली वित्तीय सहायता
वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का बैंकों को सख्त निर्देश
किशनगंज. जिले में स्वरोजगार को बढ़ावा देने व सूक्ष्म उद्योगों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से समाहरणालय स्थित महानंदा सभागार में एक भव्य ऋण वितरण शिविर का आयोजन किया गया. अपर समाहर्ता अमरेंद्र कुमार पंकज की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत चयनित लाभुकों के बीच करोड़ों रुपये की ऋण राशि का वितरण व स्वीकृति प्रदान की गयी.
योजनाओं के अनुसार ऋण वितरण का
विवरण शिविर के दौरान तीन प्रमुख केंद्रीय योजनाओं के तहत लाभुकों को लाभान्वित किया गया. इस विशेष कैंप के माध्यम से जिले के उद्यमियों व कारीगरों को लगभग 1.81 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता सुनिश्चित की गयी.
योजना का नाम लाभुक संख्या स्वीकृत/भुगतान राशि मुख्य उद्देश्य
पीएमजीईपी (रोजगार सृजन) 11 ₹77.5 लाख गैर-कृषि क्षेत्र में नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना.
पीएमएफएमई (खाद्य उद्यम) 06 ₹99 लाख खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का आधुनिकीकरण.पीएम विश्वकर्मा 05 ₹05 लाख पारंपरिक शिल्पकारों को कौशल और वित्तीय मदद.
सुस्त प्रगति वाले बैंकों पर होगी कार्रवाई
ऋण वितरण के पश्चात अपर समाहर्ता ने उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक की. बैठक में उन्होंने वित्तीय वर्ष की समाप्ति को देखते हुए सख्त रुख अपनाया. सभी संबंधित बैंकों और विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि निर्धारित लक्ष्यों को 100% पूरा करें. जिन बैंकों की प्रगति संतोषजनक नहीं है, उनके वरीय पदाधिकारियों को सूचित कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए. बैठक में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक अनिल कुमार सहित विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लाभार्थी उपस्थित थे.आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमअपर समाहर्ता ने योजनाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पीएमईजीपी जहां बेरोजगार युवाओं को उद्यमी बना रहा है, वहीं पीएमएफएमई खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में छोटे उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहा है. साथ ही, पीएम विश्वकर्मा योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों को सस्ती ब्याज दर पर ऋण व डिजिटल मार्केटिंग का सहयोग देकर उनके पुश्तैनी कौशल को आधुनिक पहचान दी जा रही है.
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