राजस्व लाखों में, सुविधा कुछ भी नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :11 May 2015 10:29 AM (IST)
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छत्तरगाछ (किशनगंज): प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये का राजस्व वसूली देने वाला पोठिया प्रखंड का सबसे पुराना व ऐतिहासिक छत्तरगाछ हाट में आज समस्याओं का अंबार है. हालांकि आज भी पोठिया तथा ठाकुरगंज प्रखंड के लोगों के लिए छत्तरगाछ हाट संगम माना जाता है. जहां महानंदा के पश्चिम छोड़ में बसा ठाकुरगंज प्रखंड के लोग नदी […]
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छत्तरगाछ (किशनगंज): प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये का राजस्व वसूली देने वाला पोठिया प्रखंड का सबसे पुराना व ऐतिहासिक छत्तरगाछ हाट में आज समस्याओं का अंबार है. हालांकि आज भी पोठिया तथा ठाकुरगंज प्रखंड के लोगों के लिए छत्तरगाछ हाट संगम माना जाता है.
जहां महानंदा के पश्चिम छोड़ में बसा ठाकुरगंज प्रखंड के लोग नदी पार होकर शनिवार व बुधवार को अपने जरूरत के तहत छत्तरगाछ हाट आते है.वहीं पोठिया प्रखंड के डोंक नदी के पूरबी छोर में बसे आधा दर्जन से अधिक पंचायतों के लोग बरसात हो या सूखा नदी पार छत्तरगाछ हाट आते है.
आजादी के पूर्व से ही लगता है छत्तरगाछ हाट
छत्तरगाछ हाट आजादी के पूर्व से ही लगता आ रहा है. लेकिन 80 के दशक में बिहार सरकार के काबिना मंत्री स्व मोहम्मद हुसैन आजाद के प्रयास से छत्तरगाछ में मेला भी लगता था. तब छत्तरगाछ हाट की रौनक कुछ और थी.परंतु आज स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण छत्तरगाछ हाट कई समस्याओं से जूझ रहा है. जिससे स्थानीय दुकानदारों सहित हाट में आये लोगों को कई परेशानियों से गुजरना पड़ता है. ज्ञात हो कि इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय, रेफरल अस्पताल, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, उत्कृष्ट मध्य विद्यालय तथा पावर हाउस छत्तरगाछ की शान में चार चांद लगा देता है. छत्तरगाछ हाट में आज भी पाट, धान, अदरक से लेकर मवेशियों की खरीद बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही है. विडंबना ही कहा जाये कि आज हाट धीरे-धीरे अस्तित्व को खोता जा रहा है.
बदलाव के लिए किसी ने नहीं की पहल
मुखिया मो सलमान कहते है कि छत्तरगाछ हाट आज भी पोठिया तथा ठाकुरगंज प्रखंड के लिए संगम माना जाता है. परंतु छत्तरगाछ हाट आज कई समस्याओं से जूझ रहा है. सड़क, नाला शेड तथा जल जमाव की समस्याओं को लेकर लोग काफी परेशान हैं. इसे दुरुस्त करने की मांग कई बार की गयी है लेकिन अब तक इस दिशा में न ही अधिकारियों ने कोई पहल की है और न ही जनप्रतिनिधियों ने. इसका खामियाजा आमलोगों को भुगतना पड़ता है.
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