महीनगांव उपस्वास्थ्य केंद्र बदहाल, झोलाछाप डॉक्टरों की कट रही चांदी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Jun 2019 5:50 AM
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किशनगंज : किशनगंज जिले के ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है. यह बदहाली शासन की उदासीनता के कारण गांव में बसे गरीब किसानों को स्वास्थ्य सुविधा से वंचित कर रही है. पंचायत स्तर पर बने स्वास्थ्य उपकेन्द्र सालभर में किसी कार्यक्रम पर ही खुलता है. गांव के लोगों के लिए यह स्वास्थ्य उपकेंद्र […]
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किशनगंज : किशनगंज जिले के ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है. यह बदहाली शासन की उदासीनता के कारण गांव में बसे गरीब किसानों को स्वास्थ्य सुविधा से वंचित कर रही है. पंचायत स्तर पर बने स्वास्थ्य उपकेन्द्र सालभर में किसी कार्यक्रम पर ही खुलता है.
गांव के लोगों के लिए यह स्वास्थ्य उपकेंद्र सफेद हाथी साबित हो रहा है. जिले में दर्जनों अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र भवन करोड़ों की लागत से बना है, लेकिन डॉक्टर के अभाव में यह केंद्र पर लोगों को चिकित्सीय सुविधा नहीं मिल पा रहा है.
महीनगांव में बने अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र पर वर्षों से ताला लटका रहा. अब पिछले कुछ महीनों से प्रसव की सुविधा उपलब्ध की गयी. हालांकि दो तीन कर्मी नियुक्त हैं, लेकिन कारगर साबित नहीं हो रहा है. लोगों की मानें, तो दशकों से सरकारी स्तर पर आम गरीब लोगों को स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल सका, जो वर्तमान समय में काफी महत्वपूर्ण है.
सरकार और सिस्टम दावा जरूर करती है लेकिन धरातल पर दिखायी नहीं देता. प्रखंड के मोतिहारा तालुका, हालामाला, सिंघिया कुलामनी, गाछपरा, चकला, दौला पंचायत में बने स्वास्थ्य केंद्र पर अक्सर ताला लगा रहने से स्थानीय स्तर पर अतिक्रमण का शिकार बना हुआ रहता है.
यह एक ब्लॉक की नहीं अमूमन पूरे जिले की स्थिति बनी हुई है. विभागीय अधिकारी की मानें, तो जिले में डॉक्टर, स्टाफ नर्स सहित अन्य कर्मियों की घोर कमी है, जिसकी रिपोर्ट राज्य स्तर पर विभागीय अधिकारी व मंत्रालय को भेजी गयी है. शहर के डॉक्टर के पास इलाज कराना सभी गरीब व आर्थिक तंगी के जूझ रहे परिवार के लिए संभव नहीं होता.
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों को हो रही परेशानी
स्वास्थ्य महकमे की ढुलमुल रवैये के कारण ग्रामीण क्षेत्र में झोलाझाप डॉक्टर ही एक मात्र गरीबों के सेहत को ठीक करते हैं. गरीब परिवार के लिए सस्ते दर पर इलाज हो जाता है, जिस कारण विगत एक दशक में ग्रामीण क्षेत्र में झोलाझाप डॉक्टरों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है. अब तो गांव में भी क्लिनिक व नर्सिंग होम खुलने शुरू हो गये हैं.
आरआइ तक सिमट गया विभाग
जिला स्वास्थ्य महकमे सरकारी अभियान व टीकाकरण अभियान तक ही सिमट कर रह गया है. आम लोगों को बुखार, सर्दी की भी दवा इन दिनों स्वास्थ्य उपकेंद्र से नहीं मिलता है. ग्रामीण थक हार कर गरीबी के कारण झोलाझाप डॉक्टर से अपना इलाज कराते हैं.
निजी क्लिनिक में बढ़ी भीड़
ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी तंत्र फेल होने का लाभ निजी डॉक्टर उठा रहे हैं. इन डॉक्टरों के पास मामूली बुखार के लिए भी कई पैथोलॉजी जांच के बाद ही दवा मिलती है. जांच व दवा और डॉक्टर की फीस गरीबों पर भारी बोझ बन जाता है, लेकिन सरकारी स्तर पर इस दिशा में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है. झोला छाप डॉक्टर व डिग्री धारक डॉक्टर के तालमेल से गरीबों की जेब ढीली होती जा रही है.
डॉक्टर व स्टाफ नर्स की है कमी
पीएचसी अंतर्गत डॉक्टर व स्टाफ की कमी है. प्रत्येक स्वास्थ्य उपकेंद्र पर एक-एक एएनएम कार्यरत हैं, जो टीकाकरण के बाद महीने में एक दिन उपकेन्द्र खोलने का निर्देश दिया गया है. इस बात की रिपोर्ट राज्य स्तर व विभागीय अधिकारियों व मंत्रालय को भेजी गयी है.
डॉ सीएन मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बेलवा
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