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आचार संहिता लागू होते ही राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म

Updated at : 14 Mar 2019 7:20 AM (IST)
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आचार संहिता लागू होते ही राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म

कुर्लीकोट : आदर्श आचार संहिता लागू होते ही राजनीतिक चर्चा का बाजार गर्म होता जा रहा हैं. चाय स्टॉल, सैलून, चौराहा, ट्रेनों, बसों में सामान्य तौर पर राजनीति की बाते सुनने को मिल रही है. चुनावी सुगबुगाहट तो ऐसी जगी है कि लोग समीकरण जोड़ने और जोड़वाने क लिए अपने महत्वपूर्ण कार्यों को भी एक […]

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कुर्लीकोट : आदर्श आचार संहिता लागू होते ही राजनीतिक चर्चा का बाजार गर्म होता जा रहा हैं. चाय स्टॉल, सैलून, चौराहा, ट्रेनों, बसों में सामान्य तौर पर राजनीति की बाते सुनने को मिल रही है.
चुनावी सुगबुगाहट तो ऐसी जगी है कि लोग समीकरण जोड़ने और जोड़वाने क लिए अपने महत्वपूर्ण कार्यों को भी एक पल के लिए अनदेखी करते देर नहीं कर रहे हैं. 10 मार्च दिन रविवार को शाम में चुनाव आयोग द्वारा लोकतंत्र के महापर्व की घोषणा हुईं. आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में कुल सात चरणों में मतदान होना है.
जिसमें किशनगंज जिले में दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होना है. किशनगंज जिले में कुल 1438990 मतदाताओं वाली संसदीय क्षेत्र से 2014 में 194612 वोटों के अंतर से कांग्रेसी सांसद मौलाना असरारुल हक कासमी ने कुर्सी बचाने में लगातर दूसरी बार सफलता प्राप्त की थी.
2009 के नए परिसीमन के मुताबिक किशनगंज संसदीय क्षेत्र में कुल 6 विधानसभा क्षेत्र शामिल है. जबकि, 676103 महिला औऱ 762874 पुरुष मतदाता पर पिछली बार 2014 के लोकसभा चुनाव की बाजी लगाई गई थी.
सुगबुगाहट तो ऐसी जगी है कि जो कल तक अपने घरों में दुबके रहते थे. वे भी नेताजी के अंदाज में नए कुर्ते में बाजार में नजर आने लगे हैं. चुनावी महाकुंभ में डुबकी लगाने को तैयार हो रहे नेताजी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी राजनीतिक माहौल गर्म होते दिख रहा है.
लोकतंत्र के इस महापर्व में अबतक प्रत्याशी के नाम घोषित जाने से लोगों के मुंह पर दल के नाम पर चेहरे का भी राजनीति माहौल बनते ही दिख रहा है. महागठबंधन और एनडीए के बीच लगाई जा रही कयासबाजी का दौर जारी है.
अन्य दल और निर्दलीय प्रत्याशी की बात क्या होगी यह तो वक्त ही बताएगा. ज्यो-ज्यो चुनाव नजदीक आते जायेंगे उतनी ही राजनीति चर्चाओं का बाजार गलियों में गर्म होता चला जाएगा.
कई लोकसभा और विधानसभा के प्रत्याशियों और सत्ता का सुख भोग चुके नेताओं के द्वारा इस चुनाव में खुद उम्मीदवार उतारेंगे या फिर उनकी रणनीति क्या होगीं यह लोकतंत्र के महापर्व को दिलचस्प और रोचक बनाएगा. उम्मीदवारों के घोषणा के उपरांत ही समर्थकों और कार्यकर्ताओं में जोश देखने को मिलेगा.
फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ का सिलसिला जारी है. तो वक्त के इंतजार में हर संभव प्रयास के बावजूद दावेदार भी अभी उम्मीद का दामन थामे बैठे हैं. इस लोकतंत्र के महापर्व में गेंदबाज और बल्लेबाज के बीच निर्णायक मतदाता इसी इंतजार में है कि किस दल से कौन उम्मीदवार होंगे.
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