रमजान नदी के अस्तित्व पर मंडरा रहा है संकट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Apr 2018 6:26 AM (IST)
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कचरा व गंदगी से से भरने लगी है नदी प्रशासन की ओर से नहीं दिया जा रहा ध्यान किशनगंज : सदियों से किशनगंज शहर को अपनी अविरल स्वच्छ जलधारा से प्यास बुझाने वाली रमजान नदी आज कचरा, गंदगी से पटी पड़ी है. बारहों महीने बहने वाली रमजान नदी की जलधारा अब थम गयी है. नदी […]
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कचरा व गंदगी से से भरने लगी है नदी
प्रशासन की ओर से नहीं दिया जा रहा ध्यान
किशनगंज : सदियों से किशनगंज शहर को अपनी अविरल स्वच्छ जलधारा से प्यास बुझाने वाली रमजान नदी आज कचरा, गंदगी से पटी पड़ी है. बारहों महीने बहने वाली रमजान नदी की जलधारा अब थम गयी है. नदी की धारा थम क्यों गयी? नदी की धारा को पुनः बहाल करने के लिए आज तक बनी योजना सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गयी. वर्षा के कुछ महीने ही रमजान नदी पानी से लबालब रहती है. तीन चार महीने बाद नदी गंदे नाले में तब्दील हो जाती है.
शहर में आठ किलोमीटर तक फैली है नदी . शहर के बीचोबीच करीब 8 किमी बहने वाली यह नदी कुछ दशक पहले शहर की शान थी और आज भी है. लेकिन कुछ स्वार्थी लोगों के कारण यह नदी धीरे धीरे दम तोड़ती नजर आ रही है.किशनगंज शहर सूबे में शायद एक मात्र शहर होगा जिसके बीचोबीच नदी बहती हो.शहर के ठीक बीच से बहने वाली रमजान शहर को दो भागो में बांटती है.यह नदी अपने अतीत में शहर की पहचान थी. साथ ही इसके किनारे दर्जनों बस्तियां आबाद हई.नदी किनारे बसी बस्तियां ही नदी के लिये शाप बन गयी.इतनी सुंदर नदी आज बेरंग और बेहाल है.साल दर साल नदी को साफ करने की बात प्रशासनिक स्तर से जरूर होती है.लेकिन देखते देखते कई बरसात बीत गए. हर मोर्चे के लिये लोग आंदोलन,धरना करते है. लेकिन शहर की इस पवित्र रमजान नदी के लिये कोई आगे नहीं आता दिख रहा. जिले में दर्जनों सामाजिक संग़ठन रहते हुए भी रमजान नदी बेबस नाले में तब्दील हो सिमटती जा रही है.
दस वर्ष पूर्व डोक नदी का बंद हुआ मुहाना . स्थानीय लोगों की माने तो किशनगंज शहर से उत्तर मोतिहारा तालुका पंचायत के टुपामारी गांव के नजदीक डोक नदी के कटाव से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है. पूर्व में डोक नदी का पानी इसमें प्रवाहित होता था जिसे रमजान में सालों भी पर्याप्त पानी की अविरल धारा बहती थी.
करीब 10 वर्ष पूर्व डोक नदी की धारा बदलने से नदी की मुहाने पर बालू जमा हो गया.जिससे रमजान नदी सर्फ बारिश पर ही निर्भर हो गयी.स्थानीय लोग आज भी नदी के विलुप्त होने को लेकर चिंतित है.रमजान अपने उदगम स्थल से करीब 180 किलोमीटर सफर तय करती हुई बारसोई के पास महानंदा नदी में जाकर मिलती है.
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