डिजिटलीकरण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण पहल : डीएम

Published by :AWADHESH KUMAR
Published at :13 Apr 2026 7:36 PM (IST)
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डिजिटलीकरण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण पहल : डीएम

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का डिजिटलीकरण कि समीक्षा जिला पदाधिकारी विशाल राज के द्वारा सोमवार को की गई है

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट का डिजिटलीकरण कि समीक्षा डीएम ने की

किशनगंज पोस्टमार्टम रिपोर्ट का डिजिटलीकरण कि समीक्षा जिला पदाधिकारी विशाल राज के द्वारा सोमवार को की गई है.समीक्षा बैठक में जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक की संस्थानवार प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई. इस अवधि में जिले में कुल 324 मामलों का पंजीकरण हुआ, जिनमें 204 मामलों को स्थिर (फ्रीज) तथा 119 मामलों को पुनः सक्रिय (अनफ्रीज) किया गया. एक मामले को संदर्भित किया गया, जबकि किसी भी मामले को निरस्त नहीं किया गया.मिली जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में सर्वाधिक 85 मामले दर्ज हुए, जिनमें 42 स्थिर एवं 43 पुनः सक्रिय किए गए. यहां 14 चिकित्सकीय-वैधानिक मामले तथा 71 पोस्टमार्टम रिपोर्ट दर्ज किए गए, जो अन्य संस्थानों की तुलना में अधिक है. वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ठाकुरगंज में 90 मामलों के साथ 87 स्थिर मामले दर्ज किए गए. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोचाधामन में 53 मामलों में से 34 स्थिर एवं 18 पुनः सक्रिय किए गए, जिसमें एक मामला संदर्भित भी किया गया.

अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरगंज में 32, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दिघलबैंक में 13 तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोठिया में 46 मामलों का निष्पादन हुआ. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टेढ़ागाछ में 4 एवं रेफरल अस्पताल छत्तरगाछ में 1 मामला दर्ज किया गया. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किशनगंज में इस अवधि के दौरान कोई मामला दर्ज नहीं होना विशेष ध्यान देने योग्य है.

जिलाधिकारी का सख्त निर्देश

बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीएम ने सभी संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया कि वे पोस्टमार्टम रिपोर्ट की डिजिटल प्रविष्टि को शत-प्रतिशत और समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करें. उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निष्पादित किया जाए. डीएम ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का डिजिटलीकरण केवल एक तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रक्रिया में तेजी आएगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा. सभी संस्थान इसे गंभीरता से लें और कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करें. बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस कार्य की प्रगति की पुनः समीक्षा शीघ्र ही की जाएगी. जिन संस्थानों की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई जाएगी, उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस महत्वपूर्ण पहल को प्राथमिकता देते हुए जिले को डिजिटल प्रणाली में अग्रणी बनाने की दिशा में कार्य करें.

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