हरिद्वार से देवघर तक पैदल धर्मयात्रा के दौरान अगुवानी पहुंचे साधु संतों का किया स्वागत

हरिद्वार से देवघर तक पैदल धर्मयात्रा के दौरान अगुवानी पहुंचे साधु संतों का किया स्वागत
परबत्ता. आस्था, तपस्या और अटूट संकल्प का अद्भुत संगम शुक्रवार को पवित्र उत्तरवाहिनी अगुवानी गंगा घाट पर देखने को मिला, जब हरिद्वार से देवघर तक की पैदल धर्मयात्रा के क्रम में महंथ श्री 1008 ज्ञानेश्वर दास महाराज अगुवानी पहुंचे. उनके आगमन की सूचना मिलते ही पूरा क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “जय बजरंगबली” के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा. ग्रामीणों व श्रद्धालुओं ने पूजा-पाठ, आरती के साथ संत का अभिनन्दन किया. मौके पर अंतरराष्ट्रीय कथावाचक श्री श्री 108 रामायणी रामबालक दास महाराज भी अगुवानी घाट पहुंचे. उन्होंने सनातन परंपरा के अनुसार संतों और अतिथियों का भव्य स्वागत किया. अपने संबोधन में उन्होंने उत्तरवाहिनी अगुवानी गंगा घाट की आध्यात्मिक महिमा का बखान किया और महंथ श्री 1008 ज्ञानेश्वर दास महाराज के तप, त्याग और धर्मसेवा से भरे जीवन पर अपनी संतवाणी से प्रकाश डाला. इसके बाद संतों व श्रद्धालुओं के साथ गंगा स्नान, पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन किया गया. इस अवसर पर साधु संतों ने स्वयं को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि उत्तरवाहिनी अगुवानी गंगा घाट पर आकर आध्यात्मिक अनुभूति की अनुभूति होती है. ग्रामीणों ने इसे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि इस पावन धरती पर संतों का आगमन समाज में धर्म, सद्भाव और आस्था की नई ऊर्जा का संचार हुआ है. हरिद्वार से देवघर तक की यह ऐतिहासिक पदयात्रा अब आगे की ओर बढ़ चुकी है, लेकिन अगुवानी गंगा घाट में गूंजे जयघोष श्रद्धालुओं के हृदय में आस्था की अमिट छाप छोड़ गए हैं.
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