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फर्जी डिग्री पर नगर परिषद में दस वर्षों तक नौकरी करने वाले बर्खास्त जेई पर होगी प्राथमिकी

Updated at : 28 Jul 2025 8:58 PM (IST)
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फर्जी डिग्री पर नगर परिषद में दस वर्षों तक नौकरी करने वाले बर्खास्त जेई पर होगी प्राथमिकी

फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर लंबे समय तक नौकरी वाले जेई के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी.

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नप सभापति अर्चना कुमारी ने कार्यपालक पदाधिकारी को प्राथमिकी दर्ज करने का दिया आदेश ———

नगर परिषद के सशक्त स्थायी कमेटी में जेई रौशन को किया था बर्खास्त

खगड़िया. नगर परिषद में एक दशक तक फर्जी डिग्री पर नौकरी करने वाले कनीय अभियंता रौशन कुमार पर प्राथमिकी दर्ज होगी. नगर सभापति अर्चना कुमारी ने कार्यपालक पदाधिकारी को वर्षों तक फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने वाले जेई रौशन कुमार के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा है.

जांच में डिप्टी कंट्रोलर ने मार्कशीट को बताया फर्जी

बर्खास्त नगर परिषद के जेई रौशन कुमार के सटिर्फिकेट की जांच राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड बिहार द्वारा कराया गया. जांच बाद तकनीकी शिक्षा बोर्ड द्वारा भेजी गई सत्यापन रिपोर्ट में रौशन कुमार के डिप्लोमा अंकपत्र को पूरी तरह जाली घोषित किया. इस खुलासे से नगर परिषद और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया. फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर लंबे समय तक नौकरी वाले जेई के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी. मालूम हो कि वर्ष 2014 में सशक्त स्थायी समिति की अनुशंसा पर रौशन कुमार को संविदा पर 1100 प्रतिदिन के मानदेय पर नियुक्त किया गया था. बाद में यह राशि बढ़ाकर 22 हजार रूपये मासिक कर दी गयी थी और वे सेवा में बने रहे. हालांकि, दस्तावेजों की जांच और सत्यापन में फर्जीवाड़े की बातें सामने आयी. बताया जाता है कि कनीय अभियंता के रिक्त पद पर नियुक्त के लिए नगर परिषद कार्यालय के पत्रांक-2095 दिनांक 19.08.2013 द्वारा विज्ञापन प्रकाशित कराया था. नियुक्ति के लिए कुल 28 आवेदन प्राप्त हुआ था. जिसमें तीन अनुपस्थित थे. इस नियुक्ति के लिए रौशन कुमार ने भी अपना आवेदन दिया था. लेकिन, बोर्ड की बैठक के प्रस्ताव संख्या 07 (ii) में पारित निर्णय के आलोक में नियुक्ति प्रक्रिया रद्द कर दी गयी थी. जिसके बाद तत्कालीन पदाधिकारी द्वारा स्वयं संज्ञान लेते हुए सशक्त स्थायी समिति का अनुमोदन प्राप्त कर वर्ष 2014 में रौशन कुमार को नगर परिषद द्वारा 1100 प्रति कार्य दिवस के आधार पर रख लिया गया था. जिसके बाद से जेई रौशन कुमार लगातार वर्ष 2025 तक कार्यरत रहे. उसके बाद नगर सभापति अर्चना कुमारी एवं सशक्त स्थाई समिति द्वारा कनीय अभियंता रौशन कुमार को हटाने की अनुशंसा की. अनुशंसा बाद रौशन कुमार को नगर परिषद के कनीय अभियंता के पद से बर्खास्त कर दिया गया था.

वर्ष 2014 में नियोजन में बरती गयी थी अनियमितता

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कैप्सन-अर्चना कुमारी, नगर सभापति.

नगर सभापति अर्चना कुमारी ने कहा कि जेई रौशन कुमार नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से नौकरी प्राप्त की थी. कहा कि वर्ष 2014 में संबंधित अधिकारियों द्वारा नियोजन में विहित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था. मनमाने तरीके से सशक्त स्थायी समिति के अनुमोदन के आधार पर रौशन कुमार को कनीय अभियंता के पद पर नियुक्त किया गया था. अब रौशन के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी जा रही है.

कहते हैं नगर उपसभापति

नगर परिषद की उपसभापति शबनम जबीन ने कहा कि फर्जी तरीके से बहाल जेई के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए. जेई द्वारा नगर परिषद कार्य में लूट का अड्डा बना लिया था. देर से ही सच सामने आ गया. अब दस वर्षों का अवैध रूप से की गयी कमाई की भी जांच होनी चाहिए.

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कहते हैं नगर परिषद के बर्खास्त जेई

नगर परिषद के बर्खास्त जेई रौशन कुमार ने बताया कि उन्हें अवैध तरीके से बर्खास्त किया गया है. मामला न्यायालय में चल रहा है. जल्द ही सच सामने आ जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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