पसराहा में आधुनिक रोटरी ट्रैफिक सिस्टम का निर्माण तेज, 2026 तक फोरलेन शुरू करने का लक्ष्य

Published by :RAJKISHORE SINGH
Published at :26 Apr 2026 9:10 PM (IST)
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पसराहा में आधुनिक रोटरी ट्रैफिक सिस्टम का निर्माण तेज, 2026 तक फोरलेन शुरू करने का लक्ष्य

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस नई व्यवस्था से ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत मिलेगी

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पसराहा. अगुआनी फोरलेन एप्रोच पथ का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. यातायात व्यवस्था को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए नई तकनीक से रोटरी ट्रैफिक प्रणाली का निर्माण कार्य तेजी से जारी है. पसराहा जोन के धसान क्षेत्र में विशेष रूप से सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है. ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके. निर्माण कार्य में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है. सड़क की मजबूती और टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए मिट्टी के नीचे विशेष प्रकार की चादर (जियो-टेक्सटाइल) बिछाई जा रही है. इससे सड़क धंसने या कमजोर होने की समस्या में काफी कमी आएगी. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस नई व्यवस्था से ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत मिलेगी और आवागमन अधिक व्यवस्थित होगा. साथ ही भारी वाहनों की आवाजाही भी सुचारु रूप से हो सकेगी. बताया गया कि निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए तेजी लाई गई है. इसके पूरा होने के बाद पसराहा क्षेत्र में यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. जियो-टेक्सटाइल एक विशेष प्रकार का सिंथेटिक कपड़ा होता है, जिसे सिविल इंजीनियरिंग और निर्माण कार्यों में मिट्टी की मजबूती और स्थिरता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसे जमीन की सतह पर या विभिन्न परतों के बीच बिछाया जाता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और निर्माण कार्य अधिक टिकाऊ बनता है. जियो-टेक्सटाइल बिछाने से सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि यह मिट्टी के कटाव को रोकता है. खासकर नदियों के किनारे, ढलान वाले क्षेत्रों, और बारिश के समय यह मिट्टी को बहने से बचाता है. इसके अलावा, यह सड़क, रेलवे ट्रैक, पुल और भवन निर्माण में आधार को मजबूत बनाता है, जिससे संरचना की उम्र बढ़ जाती है और बार-बार मरम्मत की जरूरत कम हो जाती है. यह सामग्री मिट्टी और बजरी की परतों को अलग बनाए रखती है, जिससे बजरी मिट्टी में धंसती नहीं है. इससे सड़कें ज्यादा समय तक समतल और मजबूत रहती हैं. साथ ही, जियो-टेक्सटाइल पानी के निकास को भी बेहतर बनाता है, जिससे पानी जमा नहीं होता और निर्माण कार्यों को नुकसान नहीं पहुंचता. जियो-टेक्सटाइल हल्का, टिकाऊ, और किफायती होता है, जिससे इसे आसानी से कहीं भी लगाया जा सकता है. यह पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता है, क्योंकि यह मिट्टी के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखते हुए कटाव को नियंत्रित करता है. आज के समय में जियो-टेक्सटाइल तकनीक आधुनिक निर्माण कार्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, जो न सिर्फ लागत को कम करती है बल्कि संरचनाओं को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है.

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