मछली उत्पादन में खगड़िया ने मारी बाजी, बिहार में हासिल किया 8वां स्थान, जानें कैसे बदल रही जिले की तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर
Khagaria Fish Production : कभी बाहर से आती थी मछली, अब खगड़िया बन रहा सप्लाई हब. खगड़िया ने मछली उत्पादन में बिहार में 8वां स्थान हासिल किया है. वर्ष 2025-26 में जिले में 39,240 टन मछली उत्पादन हुआ.
खगड़िया गोगरी से रणवीर झा की रिपोर्ट
Khagaria Fish Production : खगड़िया अब सिर्फ बाढ़ और खेती के लिए ही नहीं, बल्कि मछली उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट ने जिले के मत्स्य पालकों के लिए बड़ी खुशखबरी दी है. वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार खगड़िया पूरे बिहार में मछली उत्पादन के मामले में आठवें स्थान पर पहुंच गया है. खास बात यह है कि जिले में मछली उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और अब यहां की मछलियां दूसरे जिलों के साथ-साथ कोलकाता जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच रही हैं.
खगड़िया में बढ़ा मछली उत्पादन, एक साल में हुआ इजाफा
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में खगड़िया में 39 हजार 240 टन मछली का उत्पादन हुआ है. जबकि वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 38 हजार 880 टन था. यानी एक वर्ष में जिले में 360 टन अतिरिक्त मछली का उत्पादन दर्ज किया गया है.

मत्स्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि सरकारी अनुदान योजनाओं, तकनीकी सहायता और बड़ी संख्या में किसानों के मत्स्य पालन से जुड़ने के कारण उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है.
कैसे बदल रही है खगड़िया की अर्थव्यवस्था?
एक समय था जब जिले के कई ग्रामीण परिवार सिर्फ पारंपरिक खेती पर निर्भर थे. लेकिन अब बड़ी संख्या में किसान तालाब आधारित मत्स्य पालन को आय का प्रमुख स्रोत बना रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद खगड़िया ने अपने जल संसाधनों को अवसर में बदलने का काम किया है. जिले के हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं.
उत्पादन अधिक, दूसरे राज्यों से फिर भी आ रही मछलियां
खगड़िया में उत्पादन खपत से अधिक होने के कारण पिछले वर्ष यहां से मछलियों की आपूर्ति पड़ोसी जिलों और कोलकाता तक की गई थी. इसके बावजूद बिहार को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए अभी भी दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार बिहार में सालाना करीब 12.90 लाख टन मछली की आवश्यकता है. जबकि राज्य में अभी भी ढाई लाख टन से अधिक की कमी बनी हुई है. यही वजह है कि आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल से बड़ी मात्रा में मछलियां मंगाई जाती हैं.
Khagaria Fish Production : बिहार में कौन जिला सबसे आगे?
राज्य स्तर पर मधुबनी 130.7 हजार टन उत्पादन के साथ पहले स्थान पर है. इसके बाद पूर्वी चंपारण, दरभंगा, कटिहार, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण और बेगूसराय का स्थान है.
खगड़िया 39.24 हजार टन उत्पादन के साथ आठवें स्थान पर पहुंच गया है, जो जिले के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.
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सरकारी योजनाओं से मिल रही रफ्तार
मत्स्य विभाग द्वारा तालाब निर्माण, तालाब जीर्णोद्धार, मत्स्य बीज वितरण और अनुदान आधारित योजनाएं संचालित की जा रही हैं. इन योजनाओं का लाभ लेकर बड़ी संख्या में किसान आधुनिक तकनीक से मछली पालन कर रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी सहायता और बाजार सुविधा को और मजबूत किया जाए तो आने वाले वर्षों में खगड़िया बिहार के शीर्ष पांच जिलों में शामिल हो सकता है.
स्थानीय किसानों को क्या फायदा?
मछली उत्पादन बढ़ने से किसानों की आमदनी में वृद्धि हुई है. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं. साथ ही जिले की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिली है. कई युवा अब पारंपरिक नौकरी की बजाय मत्स्य पालन को उद्यम के रूप में अपना रहे हैं.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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