भू-अर्जन के पेच में फंसा काम

Updated at : 16 Jan 2017 4:07 AM (IST)
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भू-अर्जन के पेच में फंसा काम

अनदेखी. करोड़ों खर्च के बाद भी शहर नहीं हो पाया बाढ़ से सुरक्षित शहर सुरक्षा तटबंध का निर्माण कार्य काफी जोर शोर से आरंभ किया गया था. निर्माण के नाम पर अब तक आधी से अधिक राशि भी खर्च हो चुकी है, लेकिन अब भी तटबंध का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है. इस कारण […]

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अनदेखी. करोड़ों खर्च के बाद भी शहर नहीं हो पाया बाढ़ से सुरक्षित

शहर सुरक्षा तटबंध का निर्माण कार्य काफी जोर शोर से आरंभ किया गया था. निर्माण के नाम पर अब तक आधी से अधिक राशि भी खर्च हो चुकी है, लेकिन अब भी तटबंध का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है. इस कारण शहर की सुरक्षा आज भगवान भरोसे है.
खगड़िया : खगड़िया जिला बीते तीन दशक में कई बार बाढ़ की चपेट में आ चुका है. बाढ़ के कारण जान माल का भी काफी नुकसान हुआ है. लोगों को बेघर होना पड़ा है. भूखे रहना पड़ा रहा है. काफी नुकसान के साथ साथ बाढ़ ने लोगों की जान तक ले ली है. बाढ़ ने शहर को भी नहीं बख्शा है. जानकार बताते हैं कि वर्ष 1987, 2000, 2002 एवं 2007 में आयी भीषण बाढ़ का पानी शहर में भी घुसा था. जिससे सरकारी अभिलेखों को नुकसान तो हुआ ही था साथ ही शहरवासियों को भी काफी परेशानी हुई थी.
वर्ष 2007 में आयी बाढ़ के बाद कम से कम खगड़िया शहर को बचाने की कवायद शुरू की गयी थी. बाढ़ के प्रभाव से शहर को बचाने के लिए ठीक अगले वर्ष 2008 में ही तैयारी आरंभ कर दी गयी. चनहा नदी के बांये तटबंध को चौड़ा एवं ऊंचा करने की योजना बनायी गयी तथा कार्य भी आरंभ किया गया. निर्माण का मुख्य उद्देश्य यह था कि शहर में पानी के प्रवेश को रोका जा सके. जानकार बताते हैं कि लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से 27.8 किलोमीटर लंबे तटबंध का निर्माण कराया जाना था. इस कार्य को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कराना था. लेकिन सारी योजना धरी की धरी रह गयी.
शहर सुरक्षा तटबंध का निर्माण कार्य काफी जोर शोर से आरंभ किया गया था. निर्माण के नाम पर अब तक आधी से अधिक राशि भी खर्च हो चुंकी है. लेकिन अब भी तटबंध का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है. जिस कारण शहर की सुरक्षा आज भगवान भरोसे है. जब कभी बाढ़ आएगी तो निश्चित ही पानी शहर में भी प्रवेश कर जाएगा. जानकार बताते है कि निर्माण कार्य की समय सीमा भी काफी पहले समाप्त हो चुकी है. फिर भी निर्माण पूरा नहीं हो पाया. जबकि 8 वर्ष पूर्व ही इस तटबंध का निर्माण कार्य आरंभ किया गया था.
क्या है पेच : भू अर्जन की पेंच के कारण शहर सुरक्षा तटबंध का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है. तटबंध निर्माण के लिए जमीन आधिग्रहण नहीं होने की वजह से निर्माण कार्य करीब दो तीन वर्षों से बंद पड़ा हुआ है. सदर विधायक पूनम देवी यादव के द्वारा पूछे गये सवाल के आलोक में बाढ़ प्रमण्डल दो के कार्यपालक अभियंता ने जिलास्तर पर यह रिपोर्ट दी है कि जमीन अधिग्रहण कार्य पूरा नहीं होने की वजह से तटबंध का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है.
कई पंचायत भी होंगे सुरक्षित
शहर सुरक्षा तटबंध का निर्माण पूरा हो जाने के बाद खगड़िया शहर ही नहीं बल्कि अलौली प्रखंड की कुछ पंचायतों के साथ साथ सदर प्रखंड की बरैय, रहीमपुर उत्तरी, मध्य एवं दक्षिणी पंचायतों को छोड़कर यहां की सभी पंचायतें सुरक्षित हो जायेंगी. क्योंकि ये सभी पंचायत चनहा नदी के दक्षिणी ओर अवस्थित है और तटबंध के दक्षिणी भाग को ऊंचा व चौड़ा बनाया जा रहा है. यह अलग बात है कि अगर खगड़िया जिले में पड़ने वाली बुढ़ी गंडक का उत्तरी तटबंध टूटता है तो न तो शहर बचेंगे और न ही बाढ़ के प्रभाव से उक्त सभी पंचायत.
3.85 किमी अधूरा है तटबंध
कार्यपालक अभियंता की रिपोर्ट के मुताबिक सदर अंचल के बभनगामा मौजा में भूअर्जन की प्रक्रिया लंबित है. इस मौजा में 3.85 किमी लंबी तटबंध का निर्माण कराया जाना शेष है. उन्होंने बताया कि 23.95 किमी तटबंध का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है. जानकार बताते हैं कि कुछ वर्ष पूर्व बभनगामा मौजा के किसानों ने ही जमीन के मुआवजा की मांग करते हुए तटबंध का निर्माण रोक दिया था. तभी से कार्य रुका हुआ है. फिलहाल भूअर्जन की प्रक्रिया चल रही है. इस कार्य को पूरा होने में थोड़ा वक्त और लग सकता है.
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