सीएम ने जीविका दीदी को सौंपी कई जिम्मेदारियां
Updated at : 13 Jan 2017 5:56 AM (IST)
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गोगरी : निश्चय यात्रा के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चेतना सभा के दौरान जिले के पांच हजार जीविका दीदी को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी सौंपते हुए लोगों से शौचमुक्त बिहार का सपना साकार करने में सहयोग की अपील की. साथ ही सभा में मौजूद महिलाओं को शराबबंदी के साथ नशा मुक्ति के लिए उनसे सहयोग मांगा […]
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गोगरी : निश्चय यात्रा के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चेतना सभा के दौरान जिले के पांच हजार जीविका दीदी को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी सौंपते हुए लोगों से शौचमुक्त बिहार का सपना साकार करने में सहयोग की अपील की. साथ ही सभा में मौजूद महिलाओं को शराबबंदी के साथ नशा मुक्ति के लिए उनसे सहयोग मांगा गया. उन्होंने कहा कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी तो है लेकिन इसके लिए सतर्कता के साथ नजर रखना भी जरूरी है.
2017 तक पूरा बिहार खुले में शौच मुक्त : लोहिया बिहार स्वच्छता मिशन के तहत लोगों के अंदर खुले से शौच मुक्त होने के लिए जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए सीएम ने अपने विचार रखे. सीएम ने कहा कि 90 प्रतिशत बीमारी से अगर मुक्ति चाहिए तो पंचायतों को खुले से शौच से मुक्त करना होगा. उन्होंने कहा कि हर हाल में वर्ष 2017 तक बिहार को खुले से शौच मुक्त करना है. इसके लिए जीविका दीदी को ग्रामीण क्षेत्र में उत्प्रेरक की भूमिका निभाने की जिम्मेवारी भी सौंपी. सभा में मौजूद जीविका दीदी को सीएम ने दिये गये कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प भी कराया.
बिजली के सदुपयोग के फायदे बतायेगी जीविका दीदी : घर -घर बिजली कनेक्शन के संबंध में सीएम ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2017 के अंत तक हर घर में बिजली कनेक्शन पहुंचाया जायेगा. यह शिकायत भी आती है कि ज्यादा बिजली बिल उपभोक्ताओं से वसूल किया जाता है. इसके लिए स्पॉट बीलिंग की व्यवस्था की जा रही है. उन्होंने ऊर्जा मंत्री से हुई बातचीत का ब्योरा देते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि वे दिन में बत्ती नहीं जलायें. इससे उन्हें ज्यादा बिल भरना होगा. दिन में तो सूरज की रोशनी होती ही हैं. दिन में किसी के घर में बिजली नहीं जले. इसके लिए जीविका दीदी को इसके निगरानी की जिम्मेवारी सौंपते हुए ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने को कहा.
बच्चियों की शिक्षा में हुआ सुधार
सीएम ने राज्य के पंचायतों व नगर निकायों के माध्यम से 50 प्रतिशत के आरक्षण व्यवस्था के संबंध में भी जोरदार तरीके से अपना पक्ष रखा. साथ ही बच्चियों की शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे उत्तरोत्तर सुधार के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पहले समाज में बेटियों को पोशाक नहीं रहने के कारण माता पिता उन्हें स्कूल नहीं भेजना चाहते थे. अगर साइकिल चलाते कोई देख लेता था तो समाज में तरह-तरह की बातें होने लगती थी. इस कारण बच्चियां उवि में जाकर शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाती थी. नतीजा यह था कि 9 वीं कक्षा में पहले एक लाख 70 हजार बच्चियों का ही नामांकन दर्ज हुआ था. बच्चियों के लिए चलाये गये पोशाक व साइकिल योजना के बाद इसमें गजब की वृद्धि देखने को मिली. यह संख्या 8 लाख 15 हजार पहुंच गयी है.
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