कठपुतली कला जनसंचार का है सशक्त माध्यम

Published at :10 Nov 2016 6:48 AM (IST)
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कठपुतली कला जनसंचार का है सशक्त माध्यम

आयोजन. कठपुतली निर्माण पर कार्यशाला आरंभ राजमाता माधुरी देवी शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय में मंगलवार को लोक कला (कठपुतली) के माध्यम से विज्ञान संचार पर कार्यशाला की शुरुआत हुई. इसमें वक्ताओं ने कठपुतली कला को सहजता से जनमानस तक अपनी बात सहजता से पहुंचाने का माध्यम बताया. खगड़िया : भारत सरकार के विज्ञान व प्रौद्योगिकी संचार […]

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आयोजन. कठपुतली निर्माण पर कार्यशाला आरंभ

राजमाता माधुरी देवी शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय में मंगलवार को लोक कला (कठपुतली) के माध्यम से विज्ञान संचार पर कार्यशाला की शुरुआत हुई. इसमें वक्ताओं ने कठपुतली कला को सहजता से जनमानस तक अपनी बात सहजता से पहुंचाने का माध्यम बताया.
खगड़िया : भारत सरकार के विज्ञान व प्रौद्योगिकी संचार परिषद, नई दिल्ली के सहयोग से एवं राइट्स कलेक्टिव के बैनर तले लोक कला (कठपुतली) के माध्यम से विज्ञान संचार पर छह दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत स्थानीय राजमाता माधुरी देवी शिक्षण प्रशिक्षण
महाविद्यालय में मंगलवार को हुई. कार्यशाला का उद्घाटन जिला परिषद अध्यक्ष कुमारी श्वेता भारती, मैथन महाविद्यालय के प्राध्यापक डाॅ कृष्ण मुरारी सिंह, डाॅ रीना कुमारी रूबी, उषा सिंह, डाॅ अनिल ठाकुर स्थानीय सरपंच शीला देवी, प्रो कैलाश पंडित, सुशांत यादव आदि ने किया. मौके पर अतिथियों ने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि लुप्तप्राय कठपुतली विद्या को जीवंत कर उससे आम लोगों को जोड़ने का शानदार प्रयास है. जिला परिषद अध्यक्ष कुमारी श्वेता भारती ने कहा कि देश की जनसंख्या का एक बड़ा तबका आज भी काफी कम पढ़ा-लिखा है और विज्ञान की बातों को दूर की कौड़ी मानता है. इस रोचक तकनीक से हम उनतक सूचनाओं और जानकारियों को आसानी से पहुंचा सकते हैं.
मैथन कॉलेज, धनबाद के प्राध्यापक डाॅ कृष्ण मुरारी सिंह ने कहा कि इस तरह की कार्यशाला सृजनात्मकता का एक सशक्त माध्यम है. उन्होंने कहा कि विज्ञान संचार के लिए पुतुलों के प्रदर्शन से मनोरंजन के साथ-साथ वैज्ञानिक तथ्यों को सहज रूप से परोसा जा सकता है. विज्ञान संचारक उषा सिंह ने कहा कि विज्ञान संचार के लिए लोक-कलाएं अत्यंत सशक्त माध्यम साबित हो सकती है. क्यों कि ये अत्यंत सहज, सरल, रोचक व मनोरंजक तरीके से संदेशों का संप्रेषण करती हैं.
डाॅ अनिल ठाकुर ने कहा कि वर्तमान समय विज्ञान का है और जीवन व समाज का कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है. देश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रत्येक व्यक्ति तक विज्ञान का पहुंचना अत्यंत आवश्यक है. कठिन, नीरस और बोझिल विषयों को कथा कहानी-नाटक जैसी विद्याओं में पिरोकर सहजता से जनमानस तक अपनी बात पहुंचाई जा सकती है.
मौके पर जया अहमद खान, रोशन कुमार, सुशांत यादव, डाॅ रीना कुमारी रूबी सहित दर्जनों लोग ने भी विचारों को रखा. स्वागत भाषण ई धर्मेंद्र कुमार ने किया. वहीं मंच संचालन सुधीर कुमार ने किया. विषय प्रवेश राइट्स कलेक्टिव के रवि कुमार व धन्यवाद ज्ञापन मनीष कुमार ने किया.
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