समय पर सीओ ने नहीं दिया जवाब
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Oct 2016 3:32 AM (IST)
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चार सीओ से डीएम ने मांगा था स्पष्टीकरण मामला बाढ़ से हुई क्षति का भ्रामक रिपोर्ट देने का खगड़िया : समय सीमा समाप्त हो गया, लेकिन डीएम द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब अब तक चार सीओ ने नहीं दिया है. विभागीय सूत्र के अनुसार जिला स्तर पर बाढ़ से संबंधित गलत रिपोर्ट भेजने के […]
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चार सीओ से डीएम ने मांगा था स्पष्टीकरण
मामला बाढ़ से हुई क्षति का भ्रामक रिपोर्ट देने का
खगड़िया : समय सीमा समाप्त हो गया, लेकिन डीएम द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब अब तक चार सीओ ने नहीं दिया है. विभागीय सूत्र के अनुसार जिला स्तर पर बाढ़ से संबंधित गलत रिपोर्ट भेजने के कारण बीते चार अक्तूबर को ही डीएम ने परबत्ता, गोगरी, मानसी तथा खगड़िया अंचल के सीओ से स्पष्टीकरण मांगा था. इन चारों अंचलों के सीओ को जवाब दाखिल करने के लिए दो दिनों का समय दिया गया था. इनसे दो दिनों के भीतर इस बात का जवाब मांगा गया था कि भ्रामक रिपोर्ट उपलब्ध कराना कार्यालय कार्य में लापरवाही का द्योतक है. भ्रामक रिपोर्ट भेजने की जद में आये सभी चारों सीओ से जवाब देने को कहा गया था.
क्षतिग्रस्त आवास का है मामला
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष बाढ़ के कारण उक्त चारों अंचलों में सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. इन चारों अंचलों से क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन मांगा गया था. पहले इन चारों अंचलों से क्षतिग्रस्त झोपड़ी की संख्या 6338 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त, कच्चा मकान की संख्या 2404, पूर्ण रूपेण क्षतिग्रस्त कच्चा मकान की संख्या 1484 तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पक्का मकान की संख्या 742 बताकर जिलास्तर पर रिपोर्ट भेजी गयी थी. खगड़िया, परबत्ता, गोगरी तथा मानसी प्रखंड से प्राप्त क्षतिग्रस्त मकानों की इसी सूची को राज्य स्तर पर भेजकर मुआवजा के लिए आवंटन की मांग की गयी, लेकिन इन चारों अंचलों से हाल के दिनों में एक बार फिर क्षतिग्रस्त मकानों की सूची जिला स्तर पर भेजी गई. जो कि चौकाने वाला है.
पूर्व में तथा हाल के दिनों में भेजी गई सूची में काफी असामनता पायी गयी है. पहले जहां क्षतिग्रस्त झोपड़ी की संख्या 6338 बतायी गयी थी. अब मात्र 1785 बतायी गयी है. इसी तरह पहले आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकान की संख्या जहां 742 बतायी गयी थी. वहीं, अब यह आंकड़ा मात्र 90 बताया गया है. यहीं स्थिति कच्चे मकानों की भी रही है. इन दोनों सूची में बड़े अंतर को जिलास्तर पर गंभीरता से लेते हुए चारों अंचलों के
सीओ से दो दिनों में जवाब मांगा गया था.
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