गोगरी रेफरल अस्पताल में है चिकत्सिकों की कमी

Published at :18 Jan 2016 9:53 PM (IST)
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गोगरी रेफरल अस्पताल में है चिकत्सिकों की कमी

गोगरी रेफरल अस्पताल में है चिकित्सकों की कमी फोटो है 2 मेंकैप्सन- गोगरी रेफरल अस्पताल गोगरी. अनुमंडल स्थित गोगरी रेफरल अस्पताल में समस्याओं का अंबार है. एक ओर जहां चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं अस्पताल में एक ही महिला चिकित्सक है. लेकिन अस्पताल में प्रसूती […]

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गोगरी रेफरल अस्पताल में है चिकित्सकों की कमी फोटो है 2 मेंकैप्सन- गोगरी रेफरल अस्पताल गोगरी. अनुमंडल स्थित गोगरी रेफरल अस्पताल में समस्याओं का अंबार है. एक ओर जहां चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं अस्पताल में एक ही महिला चिकित्सक है. लेकिन अस्पताल में प्रसूती महिलाओं की अधिकता के कारण एक महिला चिकित्सक नाकाफी साबित हो रही है. अस्पताल में 20 से 25 प्रसव प्रतिदिन होता है. लेकिन अनुमंडल अस्पताल होने के बावजूद यहां मात्र एक महिला चिकित्सक ही है. मजबूरी में एएनएम के सहारे ही प्रसव कार्य संपन्न किया जाता है. हालांकि ड्यूटी की बात करें तो चिकित्सक बराबर तैनात रहते हैं और जरूरत पड़ने पर मरीज का इलाज मजबूरन पुरुष चिकित्सक के द्वारा ही किया जाता है. अस्पताल में ऑपरेशन की बात करें तो सिर्फ बंध्याकरण ही हो पाता है. चिकित्सा व्यवस्था की बात करें तो अनुमंडल अस्पताल का बोर्ड तो लग गया है. लेकिन अभी तक अनुमंडल जैसी सुविधा नहीं मिल रहा है. अनुमंडल अस्पताल होने पर सिजीरियन ऑपरेशन,ब्लड बैंक, पोस्टमार्टम आदि की सुविधा होनी चाहिए. लेकिन अभी यहां इस प्रकार की कोई सुविधा नहीं है. कई वर्ष पूर्व गोगरी में ब्लड बैंक बनकर तैयार है. लकिन आज तक लोगों को कोई सुविधा नहीं मिल रहा है. अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की भी व्यवस्था नहीं है. वहीं पैथोलॉजी भी बंद है. एक्सरे की बात करें तो वह भी बंद पड़ा है. चिकित्सकों की बात करें तो अस्पताल में मेडिसीन विभाग के चिकित्सक के अलावे आर्थो सर्जन,एमएस,चर्मरोग विशेषज्ञ, बच्चों के चिकित्सक, आंख, गला आदि के भी चिकित्सक नहीं हैं. इसके अलावे दो महिला चिकित्सकों के पद काफी दिनों से रिक्त हैं. यह कहा जा सकता है कि 12 के विरुद्ध मात्र चार चिकित्सकों के कंधे पर अस्पताल की जिम्मेदारी है.प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा अस्पताल में एंबुलेंस भी नहीं है. एक प्राइवेट एम्बूलेंस का सहारा समय-समय पर लिया जाता है. प्रबंधन के रवैया ढीला होने का मुख्य वजह यह है कि अस्पताल में मैनेजर का पद रिक्त है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अरविंद कुमार सिन्हा के हवाले से बताया गया कि अपने अधीनस्थ उपस्वास्थ्य केंद्र पर कड़ी देख रेख के बीच चलाने का प्रयास किया जा रहा है. अस्पताल की समस्याओं को वरीय अधिकारियों को लिख गया है.

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