तीन दिवसीय 24 कुंडीय शक्ति संवर्धन गायत्री महायज्ञ संपन्न

Published by :RAJKISHORE SINGH
Published at :25 Apr 2026 10:16 PM (IST)
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तीन दिवसीय 24 कुंडीय शक्ति संवर्धन गायत्री महायज्ञ संपन्न

गायत्री मंच से पुसवन,संस्कार विद्यारंभ संस्कार, मुंडन संस्कार कराया गया

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बेलदौर. नपं के गांधी इंटर विद्यालय के खेल मैदान में आयोजित तीन दिवसीय गायत्री महायज्ञ के तीसरे दिन शनिवार को प्रथम पाली में यज्ञ का शुभारंभ देव पूजन से किया गया. तत्पश्चात शांतिकुंज हरिद्वार से आए टोली द्वारा भजन कीर्तन के साथ हवन विधि दीक्षा कार्यक्रम सहित पुश वन संस्कार विद्या संस्कार मुंडन संस्कार अन्नप्राशन कार्यक्रम के अलावे संध्याकालीन सत्संग से महायज्ञ भक्तिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ. मौके पर शांतिकुंज हरिद्वार से आए कथावाचक सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि संस्कार का अर्थ होता है मन को सुसंस्कृत परिस्कृत करना इसके अंतर्गत किसी व्यक्ति को श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों की ओर अग्रसर करने के लिए तन मन एवं विचारों को जीव मात्र के कल्याण हेतु अग्रसर करना सनातन धर्म में 16 प्रकार के संस्कारों की व्यवस्था की गई है जो गर्भ धारण से लेकर अंत्येष्टि संस्कार तक चलता है इसलिए सच्चे इंसान बनने के लिए गर्भधारण से ही संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, इसके लिए इन्होंने अभिमन्यु एवं अष्टावक्र का प्रसंग सुनाते कहा कि संस्कार का ही असर था कि जिन्होंने गर्भ में ही बहुत उच्च शिक्षा प्राप्त कर ली थी आज विज्ञान की भी मान्यता है कि बच्चे गर्भ से ही सीखना प्रारंभ कर देते हैं उनमें सुख-दुख एवं अन्य मूल प्रवृत्ति का विकास माता-पिता परिवार समाज के वातावरण के अनुरूप उनका विकास होता है. वहीं गायत्री मंच से पुसवन,संस्कार विद्यारंभ संस्कार, मुंडन संस्कार कराया गया. इस दौरान प्रखंड संयोजक शिवकुमार यादव ने बताया कि बच्चा जब गर्भ में रहे तो उनके माता-पिता एवं परिवार को अच्छा वातावरण उपलब्ध करावे गायत्री मंत्र का पाठ सुनना चाहिए उसे हंसी खुशी और आध्यात्मिक वातावरण मिलना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी रामकृष्ण विवेकानंद की तरह हो सके. इसी तरह विद्यारंभ संस्कार से हम शिक्षा की ओर बच्चे को प्रेरित करते हैं वही मुंडन संस्कार के अंतर्गत हम जन्मजात बालों का मुंडन करते हैं और छोटी चोटी रखते है जो हमारे ग्रंथियां को ढके रहता है यह हमारे शरीर के सर्वोच्च स्थान पर प्रतिष्ठित होकर हमारे सनातन के आदर्श का प्रतीक बनकर याद दिलाता रहता है कि सनातन धर्म में उपनयन संस्कार होने के बाद दूसरा जन्म होता है इसलिए ब्राह्मण को द्विज कहा जाता है बचपन एवं जवानी की संधि बेला में होने वाला संस्कार किशोर में बचपन छोड़कर आध्यात्मिकता के साथ समाज में सक्रिय योगदान करता है. इसमें धागे की बनी जनेऊ गायत्री माता के प्रतीक के रूप में अपनी छाती पर धारण करते हैं जो सर्वश्रेष्ठ कार्य करने की प्रेरणा देती रहती है. वहीं तीन दिवसीय महायज्ञ में भक्ति भाव से शिरकत कर श्रद्धालु गदगद होते रहे. इस यज्ञ के संयोजक हरिवंश शर्मा, डॉक्टर विवेकानंद, विभूतिभूषण, किरण ज्योति, रेखा सिंह, किरण भगत मुख्य, पार्षद ममता कुमारी, शिक्षिका सुधा कुमारी, किरण गुप्ता, अशोक हितैषी, नूतन देवी, बबीता कुमारी,रघुवंश शर्मा,बादल शर्मा, समेत दर्जनों गायत्री परिवार के लोग मौजूद थे.

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