आयुष चिकत्सिक के भरोसे चल रहा एपीएचसी

Published at :03 Nov 2015 9:05 PM (IST)
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आयुष चिकत्सिक के भरोसे चल रहा एपीएचसी

आयुष चिकित्सक के भरोसे चल रहा एपीएचसी प्रतिनिधि, अलौली. प्रखंड के सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आयुष चिकित्सक के सहारे चल रहा है. सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की तबीयत अचानक खराब हो जाती है तो उन्हें आयुष चिकित्सक से ही इलाज करना पड़ता है. गंभीर रूप से पीड़ित मरीज को पीएचसी अथवा सदर अस्पताल […]

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आयुष चिकित्सक के भरोसे चल रहा एपीएचसी प्रतिनिधि, अलौली. प्रखंड के सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आयुष चिकित्सक के सहारे चल रहा है. सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की तबीयत अचानक खराब हो जाती है तो उन्हें आयुष चिकित्सक से ही इलाज करना पड़ता है. गंभीर रूप से पीड़ित मरीज को पीएचसी अथवा सदर अस्पताल पहुंचने से पहले कोई उपाय नहीं है. हालांकि प्रखंड क्षेत्र में लोगों की सुविधाओं के लिए राज्य सरकार द्वारा उप स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड कर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है. जहां आयुष चिकित्सक की ड्यूटी लगायी गयी है. हालांकि किसी भी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रात्रि में इमरजेंसी सेवा उपलब्ध नहीं कराया जाता है. अधिकांश एपीएचसी के आयुष चिकित्सक दिन में ड्यूटी बजा कर इति श्री कर लेते हैं. हाल पीएचसी का प्रखंड क्षेत्र के लोगों की सुविधाओं के लिए अलौली मुख्यालय में चल रहे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की भी स्थिति कमोवेश यही है. पीएचसी में भी चिकित्सक का अभाव है. चिकित्सक के अभाव के कारण ड्यूटी रोस्टर का पालन नहीं किया जाता है. महिला वार्ड में पुरुष मरीज भरती रहते हैं. जबकि पीएचसी पुरुष वार्ड बंद है. महिला वार्ड में तीन बेड लगा हुआ है. हालांकि पीएचसी में मरीज को भरती करने की आवश्यकता नहीं होती है.नहीं है दवा जब पीएचसी में सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं है तो अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र की बात करना भी बेकार साबित हो रहा है. पीएचसी में अधिकांश दवाएं उपलब्ध नहीं रहती है. मरीज को बाहर से दवा खरीदना पड़ता है. हालांकि स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा सभी पीएचसी को दवा की आपूर्ति के लिए एक एक लाख रुपया आवंटित किये गये हैं. लेकिन कुछ पीएचसी में तो दवा की खरीदारी तक नहीं हो पायी है. साफ सफाई की व्यवस्था नहीं साफ सफाई के नाम पर प्रति वर्ष पीएचसी में लाखों रुपये खर्च किये जा रहे हैं. लेकिन साफ सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं है. बिजली की स्थिति में सुधार हुआ है. इसके बावजूद भी 24 घंटे विद्युत आपूर्ति के नाम पर सरकार को लाखों रुपये चुकाना पड़ रहा है. इस तरह सरकार पीएचसी में 24 घंटा बिजली सेवा उपलब्ध कराने के लिए दोहरी खर्च कर रही है. एक तरफ सरकार बिजली उपलब्ध करा रही है. दूसरी तरफ बिजली उपलब्ध कराने के लिए राशि का भुगतान कर रही है. इसे देखने वाला कोई नहीं है. कहते हैं स्वास्थ्य प्रबंधक स्वास्थ्य प्रबंधक चेतन शर्मा ने बताया कि गंभीर मरीज को प्राथमिक उपचार कर बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया जाता है. कहते हैं पीएचसी प्रभारी पीएचसी प्रभारी डॉ आरएन चौधरी ने बताया कि डॉक्टरों की आपसी सहमति से रोस्टर बनायी जाती है. ड्यूटी में भी बदलाव किया जाता है. हर संभव प्रयास किया जाता है कि मरीज को सभी दवा उपलब्ध कराया जाये.

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