सिंदूर की शान के संग बढ़ाया लोकतंत्र का मान

Published at :12 Oct 2015 11:51 PM (IST)
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सिंदूर की शान के संग बढ़ाया लोकतंत्र का मान

सिंदूर की शान के संग बढ़ाया लोकतंत्र का मान -अमावस्या सोमवारी की आस्था के बीच खगड़िया में जीता लोकतंत्र -पीपल में धागा बांधने के बाद लोकतंत्र की डोर मजबूत करने पहुंची महिलाएं -कई महिलाएं तो पूजा के पहले मतदान कर लोकतंत्र में जतायी अटूट आस्था -मुस्लिम महिलाओं का वोट के प्रति उत्साह लोकतंत्र के पर्व […]

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सिंदूर की शान के संग बढ़ाया लोकतंत्र का मान -अमावस्या सोमवारी की आस्था के बीच खगड़िया में जीता लोकतंत्र -पीपल में धागा बांधने के बाद लोकतंत्र की डोर मजबूत करने पहुंची महिलाएं -कई महिलाएं तो पूजा के पहले मतदान कर लोकतंत्र में जतायी अटूट आस्था -मुस्लिम महिलाओं का वोट के प्रति उत्साह लोकतंत्र के पर्व में लगा रहे थे चार चांद इंट्रो:::::::::पति की लंबी उम्र के लिये पूजा के साथ साथ लोकतंत्र की रक्षा करना भी हम महिलाओं का कर्तव्य होना चाहिए. आखिर लोकतंत्र की ताकत जनता ही तो होती है. कई महिलाएं तो पूजा से पहले मतदान कर लोकतंत्र में अटूट आस्था का इजहार किया है. बिहार के भविष्य के सुनहरे कल की झलक के साथ बहुत सारी उम्मीदें जगाती है. – लाजो देवी. विनय, खगड़ियाअमावस्या सोमवारी पर्व के बीच खगड़िया में लोकतंत्र की जीत से सब गदगद हैं. हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण पर्व के बीच महिलाओं ने लोकतंत्र के महापर्व में भी अटूट आस्था जतायी है. महिलाओं ने सिंदूर की शान के साथ लोकतंत्र का भी मान बढ़ा कर मिसाल कायम की. कई महिलाएं तो सज-धज कर हाथों में फूल की डाली लिये मतदान केंद्र पर पहुंची हुई थी. जो इस पर्व के उत्साह में चार चांद लगा रहा था. नाक से मांग तक सिंदूर किये हुए सज-धज कर मतदान केंद्र पहुंची सुषमा ने बताया कि हिंदू धर्म में सुहागन अपने पति की लंबी उम्र के लिए अमावस्या सोमवारी का व्रत रखती हैं. इस दिन भूखे पेट रह कर पीपल के पेड़ में धागा बांध कर पतिदेव की लंबी उम्र की कामना करती हैं. इस बार अद्भूत संयोग हैं कि धर्म के इस पर्व के साथ साथ लोकतंत्र का महापर्व भी एक ही दिन पड़ा है. सो भूखे पेट रह कर भी मतदान तो करना ही है. चंदा की चोट से फैल रही चांदनी अलौली की चंदा देवी नाक से मांग तक सिंदूर किये मतदान के लिये कतार में खड़ी थी. भूखे पेट कड़ी धूप मंे मतदान के प्रति उनका उत्साह लोकतंत्र में चार चांद लगा रहा था. उनकी आंखों में लोकतंत्र की लाज रखने की भूख साफ – साफ नजर आ रही थी. माथे का पसीना तो था लेकिन चेहरे पर लोकतंत्र में भागीदारी निभाने का जोश भी दिख रहा था. इसी तरह बूथों पर कतार में खड़ी महिलाओं का वोट के प्रति उत्साह भविष्य के सुनहरे कल की झलक दिखा रही थी. आधी आबादी की लोकतंत्र में धमक सपने सच होने जैसा है. घूंघट में महिलाएं की कतार से सब गदगद सोमवार को मतदान के दिन विभिन्न मतदान केंद्रों पर मुस्लिम महिलाओं की भारी भीड़ लोकतंत्र की शान में चार चांद लगा रहे थे. वोट देने के लिये उत्साहित रुकसार ने पूछने पर बताया कि पांच साल में एक बार लोकतंत्र में जनता की ताकत का सही एहसास होता है. छोटी सी उम्र में उसकी बड़ी बातें लोकतंत्र के सुखद पहलू की ओर ध्यान खींचती नजर आई. उसने बताया कि लोकतंत्र में वोट की ताकत से भविष्य की बुनियाद तैयार होगी. जो विकास के सपने को सच करेगा. इसी गांव करीब एक दर्जन मुस्लिम महिलाएं घंटों धूप में खड़े रह कर मतदान कर लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत बना रही थी. सच में लोकतांत्रिक देश भारत की सच्ची बुनियाद भी तो सब मजहब के लोगों को साथ लेकर देश को विकसित बनाने का है. तो भला इस सपने को पूरा करने में खगडि़या की मुस्लिम महिलाएं पीछे कैसे रहती. खगडि़या में बंपर मतदान के बाद तो यही कहा जा सकता है कि लोकतंत्र … की जय हो.

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