रात्रि प्रहरी के भरोसे है प्रथम श्रेणी का पशु चिकत्सिालय

Published at :07 Oct 2015 8:28 PM (IST)
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रात्रि प्रहरी के भरोसे है प्रथम श्रेणी का पशु चिकत्सिालय

रात्रि प्रहरी के भरोसे है प्रथम श्रेणी का पशु चिकित्सालय फोटो 6 मेंकैप्सन: दवा एवं डॉक्टर के अभाव में वीरान पड़ा प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय.प्रतिनिधि, बेलदौरप्रखंड परिसर स्थित प्रथम श्रेणी का पशु चिकित्सालय कई महीनों से रात्रि प्रहरी के सहारे चल रहा है. इससे पशुओं का इलाज किस तरह होता होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया […]

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रात्रि प्रहरी के भरोसे है प्रथम श्रेणी का पशु चिकित्सालय फोटो 6 मेंकैप्सन: दवा एवं डॉक्टर के अभाव में वीरान पड़ा प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय.प्रतिनिधि, बेलदौरप्रखंड परिसर स्थित प्रथम श्रेणी का पशु चिकित्सालय कई महीनों से रात्रि प्रहरी के सहारे चल रहा है. इससे पशुओं का इलाज किस तरह होता होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. उल्लेखनीय है कि पशुओं की देख रेख के लिए प्रखंड के पूर्वी भाग तिलाठी की ओर पशु चिकित्सालय की स्थापना की गयी. इसके संचालन के लिए सरकार ने लाखों की लागत से अस्पताल भवन का निर्माण करवाया. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसमें दो डाॅक्टरों को पदस्थापित किया गया. इसमें एक डॉक्टर नियमित एवं एक डॉक्टर संविदा पर कार्यरत थे. इस पशु अस्पताल में पदस्थापित डॉक्टर देवकी नंदन प्रसाद सिंह को प्रोन्नति दिसंबर 2014 में हो गयी. वे अभी जिला मुख्यालय में जिला पशुपालन पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि संविदा पर नियुक्त डॉक्टर को स्थायी नौकरी मिल जाने के कारण उन्होंने यहां से इस्तीफा जनवरी में ही दे दिया. तब से इस पशु अस्पताल में एक रात्रि प्रहरी रह गया है. पशुपालन विभाग इस रात्रि प्रहरी के सहारे इस पशु अस्पताल का संचालन करवा रहा है. अस्पताल में डॉक्टरों के नहीं रहने से पशुपालकों को अपने पशुओं के स्वास्थ्य की देख रेख के लिए पूरी तरह झोला छाप डॉक्टरों के उपर निर्भर रहना पड़ रहा है. जहां पशु पालकों का आर्थिक शोषण किया जाता है तब जाकर पशुओं का ईलाज संभव हो पाता है. कई बार तो इन डॉक्टरों के गलत ईलाज के कारण पशुओं की अकाल मौत भी हो जाती है. पशु पालकों को तो पता भी नही कि बीमार पशुओ के ईलाज के लिए कोई सरकारी सेवा भी उपलब्ध है. ऐसे मे दुधारू एवं अन्य पालतू पशुओ का ईलाज व उचित देख रेख या तो किसान भगवान भरोसे स्वयं करते है या झोला छाप चिकित्सकों के शोषण का शिकार होने को विवश रहते है . कहते हैं अधिकारीजिला पशुपालन पदाधिकारी देवकी नंदन सिंह ने बताया कि चिकित्सक की कमी है. विभाग द्वारा मिलते ही उनकी प्रतिनियुक्ति की जायेगी.

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