‘फरकिया’ में नहीं दिख रहा फर्क

Published at :01 Oct 2015 8:01 AM (IST)
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‘फरकिया’ में नहीं दिख रहा फर्क

खगड़िया से अजीत जमीन की पैमाइश को निकले राजा टोडरमल खगड़िया की जमीन को नहीं नाप सके. कारण यह था कि इसकी सीमा का ओर-छोर उन्हें नहीं मिल पाया. नदियों से घिरे इस जिले की यही त्रसदी रही है कि कटाव के कारण गांवों का भूगोल वर्ष-दो वर्ष में बदलता रहा है. कटाव के कारण […]

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खगड़िया से अजीत
जमीन की पैमाइश को निकले राजा टोडरमल खगड़िया की जमीन को नहीं नाप सके. कारण यह था कि इसकी सीमा का ओर-छोर उन्हें नहीं मिल पाया. नदियों से घिरे इस जिले की यही त्रसदी रही है कि कटाव के कारण गांवों का भूगोल वर्ष-दो वर्ष में बदलता रहा है.
कटाव के कारण ही इसकी पैमाइश नहीं हो सकी और इसे राजा टोडरमल ने फरक कर दिया. यही कारण है कि खगड़िया को फरकिया भी कहा जाता है. हालांकि विधानसभा चुनाव को लेकर खगड़िया की चारों सीटों का समीकरण अन्य जिलों के समीकरण जैसा ही है.
इसमें कोई फरक नहीं है. किसी को माय समीकरण का भरोसा है तो किसी की अतिपिछड़ा और पिछड़ा वोटों पर नजर है. कोई दलित-महादलित पर नजर गड़ाये है तो कोई सवर्ण वोटरों पर. महेशखूंट के पास सड़क किनारे चाय पी रहे बेलदौर के सुधांशु कहते हैं कि विकास जरूरी है लेकिन जाति को भी आप नजरअंदाज नहीं कर सकते. मानसी के पास महेश निषाद चुनाव में वोट देने की बात कहते तो हैं लेकिन अपनी निराशा भी जाहिर करते हैं. कहते हैं साहब, वोट तो हर बार देते हैं. उपजाउ जमीन कट गयी अब गांव की बारी है लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है.
सब आश्वासन ही देते हैं. इस सबसे इतर खगड़िया के अनुनय की चिंता इस बात को लेकर है कि चुनाव की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है विकास से अलग मामला जाति पर आ रहा है. अनुनय पहली बार वोट डालेंगे. वह कहते हैं -जांच-परख के बाद ही अपना वोट देंगे. नेता लोग तो केवल जाति की बात करने लगे हैं. खगड़िया के विकास की चिंता किसी को नहीं है.
गंठबंधनों की लड़ाई में थर्ड फंट्र
दो बार जीत चुकी जद यू की पूनम देवी फिर मैदान में हैं. उन्हें रोकने के लिए एनडीए ने हम के राजेश कुमार को उतारा है, जो शकुनी चौधरी के पुत्र हैं. जन अधिकार पार्टी के टिकट पर नप अध्यक्ष मनोहर यादव भी यहां लड़ाई को तिकोना बनाने में जुटे हैं. खगड़िया विधानसभा की राजनीति में पूर्व विधायक रणवीर यादव केंद्र बिंदु रहे हैं. पूनम देवी यादव उनकी पत्नी हैं. पिछले चुनाव में पूनम राजद के वोट बैंक में भी सेंधमारी करने में सफल रही थी. लेकिन, इस बार का चुनावी परिदृश्य बदला हुआ है.
पारस से टक्कर को राजद का नया चेहरा
लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस की प्रतिष्ठा एक बार फिर दावं पर है. पिछले विधानसभा चुनाव में पारस को जदयू प्रत्याशी रामचंद्र सदा ने पराजित कर सबको हैरत में डाल दिया था. इस चुनाव में जदयू के सीटिंग विधायक रामचंद्र सदा बेटिकट हो चुके हैं. पिछले चुनाव में रामचंद्र सदा जद यू-भाजपा समर्थित वोट के अलावा मुसहर जाति का एकमुश्त वोट पाने में सफल रहे थे. राजद ने नये चेहरे चंदन राम को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस विधानसभा क्षेत्र में मुसहर जाति निर्णायक मतदाता हैं.
दोनों गंठबंधनों के बीच मुकाबला
पिछले चुनाव में जदयू के पन्नालाल पटेल ने लोजपा प्रत्याशी सुनीता शर्मा को पराजित किया था. इस बार जातीय समीकरण में भी उलटफेर होने से मुकाबला दिलचस्प है. जदयू ने विधायक पन्नालाल सिंह पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है. जबकि, लोजपा ने सुनीता शर्मा की जगह मिथिलेश निषाद को उतारा है. पूर्व सांसद स्व रामशरण यादव के पुत्र विजय कुमार उर्फ पांडव यादव निर्दलीय व जपा के नागेंद्र सिंह त्यागी भी मैदान में हैं.
दो स्वजातीय की लड़ाई में तीसरा कोण
परबत्ता से जदयू के आरएन सिंह, भाजपा के रामानुज चौधरी व जन अधिकार पार्टी से सुहेली मेहता मैदान में हैं. आरएन सिंह पूर्व मंत्री हैं. उपचुनाव में लोजपा के टिकट पर मैदान में उतरी सुहेली मेहता इस बार जन अधिकार पार्टी से चुनाव लड़ रही हैं.
क्षेत्र में भूमिहार जाति के लोग निर्णायक मतदाता हैं, जिसमें बंटवारे से परिणाम तय होगा. इस चुनाव में जदयू ने एक बार फिर आरएन सिंह को और भाजपा ने रामानुज चौधरी को मैदान में उतारा है. लड़ाई को त्रिकोणात्मक बनाने में जन अधिकार पार्टी मैदान में है.
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