समस्याओं से जूझ रहे हैं कटाव पीड़ित
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 May 2015 10:03 AM (IST)
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बेलदौर: कटाव पीड़ितों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है. इससे इन लोगों की जिंदगी बद से बदतर होती जा रही है. उल्लेखनीय है कि इतमादी पंचायत के चमरारही गांव के लगभग दो सौ से अधिक परिवारों का घर पिछले वर्ष कटाव का शिकार हो कोसी नदी के गर्भ में विलीन हो गया था. तब […]
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बेलदौर: कटाव पीड़ितों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है. इससे इन लोगों की जिंदगी बद से बदतर होती जा रही है. उल्लेखनीय है कि इतमादी पंचायत के चमरारही गांव के लगभग दो सौ से अधिक परिवारों का घर पिछले वर्ष कटाव का शिकार हो कोसी नदी के गर्भ में विलीन हो गया था. तब से इन परिवारों को पुनर्वासित करने का कोई ठोस उपाय अभी तक नहीं किया गया है.
इस वजह से इन परिवारों का भविष्य अंधकारमय हो गया है. कटाव के शिकार होने के बाद इन परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर जहां विपरीत असर पड़ा है, वहीं स्वास्थ्य सुविधा, पेयजल, यातायात, आवास आदि की सुविधा नहीं होने से इन परिवारों को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. पीड़ितों के मुताबिक सरकार द्वारा एक पॉलीथिन एवं कुछ नकद रुपये पीड़ितों के बीच बांट कर उन्हें अपने हाल पर जीने- मरने के लिए छोड़ दिया गया है. इन परिवारों ने कटाव के बाद बांध के बगल में खेतों में छोटी-छोटी झोपड़ियों के ऊपर टीन का छप्पर डाल कर रह रहे हैं. इस गरमी में यहां रहना इन लोगों पर भारी पड़ रहा है.
इस आबादी को सरकार पुनर्वासित तो नहीं कर पायी, वहीं यह आबादी जहां बसी हुई है, वहां उन लोगों को मूलभूत सुविधा भी अभी तक उपलब्ध करवा पाने में विफल रही है. इस गांव के लोगों के मुताबिक अभी तक बच्चों के पढ़ने के लिए स्कूल की भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गयी है. यहां के बच्चे किस स्कूल में पढ़ने के लिए जायें यह भी समस्या बनी हुई है. इस गांव के लिए जो पहले से स्कूल था वह कटाव का शिकार हो गया, तब से यह स्कूल कहां चल रहा है.
यह शिक्षा विभाग को छोड़ अन्य किसी को पता नहीं है. कटाव पीड़ितों के दर्द पर मरहम पट्टी करने के लिए कोई मसीहा नहीं मिल रहा है. पीड़ितों के मुताबिक कटाव पीड़ित परिवारों की हालत यह है कि उन्हें सभी चीजों के लिए तड़पना पड़ रहा है. आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य उपकेंद्र कोई भी सुविधा इनके पास नहीं है. इस वजह से इन केंद्रों से मिलने वाली सुविधा से कटाव पीड़ित परिवार वंचित हैं.
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