18 साल से अधूरा स्कूल भवन, फूस की छत के नीचे पढ़ने को मजबूर 190 बच्चे

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फूस के घर में संचालित विद्यालय

बरसात और तेज हवा के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे बच्चों और शिक्षकों में लगातार दुर्घटना का भय बना रहता है. कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता

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अलौली से प्रवीण कुमार प्रियांशु की रिपोर्ट:

खगड़िया: अलौली प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय सोण्डाभार की स्थिति शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर पेश कर रही है. करीब 18 वर्षों से विद्यालय भवन का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है, जिसके कारण यहां पढ़ने वाले लगभग 190 से अधिक बच्चे आज भी फूस की जर्जर छत के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

बरसात और तेज हवा के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे बच्चों और शिक्षकों में लगातार दुर्घटना का भय बना रहता है. कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

विद्यालय में कमरों की भारी कमी है, जिसके कारण कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को केवल दो कमरों में ही समायोजित कर पढ़ाई कराई जा रही है. इससे न सिर्फ पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों को बैठने और सीखने के लिए भी पर्याप्त और सुरक्षित माहौल नहीं मिल पा रहा है.

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इस समस्या को लेकर प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. लोगों ने मांग की है कि अधूरे भवन का निर्माण कार्य जल्द पूरा कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में बेहतर शिक्षा मिल सके और उनके भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़ रोका जा सके.

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Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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