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स्टेट बोरिंग से किसानों को नहीं मिला लाभ

Updated at : 11 Apr 2019 7:08 AM (IST)
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स्टेट बोरिंग से किसानों को नहीं मिला लाभ

मनसाही : प्रखंड क्षेत्र सहित जिला के 16 प्रखंडों में वर्ष 1980 से सरकार के द्वारा लगभग 60 स्टेट बोरिंग लगाया गया था. जिसमें मात्र चार से पांच स्टेट बोरिंग चालू अवस्था में है. जबकि बाकी के स्टेट बोरिंग धूल फांक रहे है. स्टेट बोरिंग निर्माण के बाद से सभी बोरिंग के रेखदेख के लिए […]

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मनसाही : प्रखंड क्षेत्र सहित जिला के 16 प्रखंडों में वर्ष 1980 से सरकार के द्वारा लगभग 60 स्टेट बोरिंग लगाया गया था. जिसमें मात्र चार से पांच स्टेट बोरिंग चालू अवस्था में है. जबकि बाकी के स्टेट बोरिंग धूल फांक रहे है. स्टेट बोरिंग निर्माण के बाद से सभी बोरिंग के रेखदेख के लिए सरकार के आदेश पर एक-एक चोकिदार लघु व जल संसाधन विभाग की ओर से करीब 120 लोगों को पम्प चालक, खलासी, चौकीदार पद पर एक नवंबर 1983 में नियुक्ति किया गया था.

जिन्हे मासिक भत्ता के रूप में पर माह 250 रूपया से शुरूआत से लेकर 14 जनवरी 2002 तक चार हजार रूपया माह तक भुगतान किया गया. इसके बात से सभी कार्यरत चौकीदार, चालक को कार्य से मुक्त कर दिया गया. इस मामला को लेकर पूर्व में कई वर्ष पहले जिला से लेकर पटना तक सरकार के खिलाब धरना प्रदशर्न किया. लेकिन इसके बदले कर्मी लोगों को सरकार की तरफ से लाठी व आंसू गैस के गोले खाने पड़े.
मनसाही के एक किसान व स्टेट बोरिंग के भूमिदाता सह स्टेट बोरिंग रेखदेख करने वाले चौकीदार श्रीराम सिंह ने बताया कि मामला सरकार के मुख्य सचिव बिहार पटना, मुख्य अभियंता लघु जल संसाधन विभाग भागलपुर, अधीक्षण अभियंता लघु सिंचाई अंचल सहरसा, कार्यपालक अभियंता लघु सिंचाई प्रमंडल कटिहार सहित हाई कोर्ट पटना तक पहुंच गया. लेकिन सरकार तक से लेकर अब तक किसानों के प्रति एक भी कार्य नहीं किया गया. मनसाही में करीब सात स्टेट बोरिंग में से मात्र एक ही स्टेट बोरिंग फुलहारा पंचायत के रोता घाट पर चालू है. बाकी के सभी स्टेट बोरिंर जंग लगकर पड़ा हुआ है. कुछ का तो मकान भी धंसकर पड़ा हुआ है.
कई करोड़ के लागत से बना स्टेट बोरिंग क्षेत्र के किसानों के खेत तक सिमेंट के नाला लोहा के पाईप बेकार पड़ा है. जिससे आज के समय में किसानों को डीजल 68 रूपया पर लीटर के दर से खरीद कर बास बोरिंग के पंप सेट से खेत पटवन करने पर विवस है. उन्होंने बताया कि जिले में कार्यरत 120 कर्मचारियों में मासिक भत्ता के इंतजार में कितने की मौत हो चुकी है.
कार्यरत पम्प चालक, चौकीदार में श्रीराम सिंह, कपिल देव महतो, निर्मल कुमार राय, अब्दुल कुद्दस, मो अबुल काशीम, अबदुल हनाब, ब्रहमदेव राय, सियाराम यादव, मो रियाजद्ददीन, मो जमालउद्दीन अंसारी, राजेन्द्र प्रसाद साह, देवलाल सिंह, राजकिशोर मिश्र, उमा कान्त ठाकुर, नरेश मंडल सहित अन्य कर्मचारियों ने कहा सरकार को इस ओर पहल करनी चाहिए. ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके.
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