1.20 लाख किसानों को जमा करना था आवेदन, तीन हजार ने ही दिखायी रुचि

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खगड़िया : किसानों के उत्थान/कल्याण के लिये चलाई जा रही महत्वपूर्ण योजना का हाल खगड़िया में काफी खराब है. धान अधिप्राप्ति का पहले से ही बुरा हाल है. वहीं अधिकांश आवेदन जांच के नाम पर लंबित रखे जाने के कारण प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की भी हालत खस्ता है. अब मुख्यमंत्री फसल सहायता योजना […]

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खगड़िया : किसानों के उत्थान/कल्याण के लिये चलाई जा रही महत्वपूर्ण योजना का हाल खगड़िया में काफी खराब है. धान अधिप्राप्ति का पहले से ही बुरा हाल है. वहीं अधिकांश आवेदन जांच के नाम पर लंबित रखे जाने के कारण प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की भी हालत खस्ता है. अब मुख्यमंत्री फसल सहायता योजना की भी प्रगति बेहद खराब बताई जा रही है.

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आंकड़े यह बता रहे है कि यह योजना भी आम किसानों के पहुंच से दूर रह गई. 1 लाख 20 हजार किसान के विरुद्ध महज 29 सौ 41 किसानों ने ही मुख्यमंत्री फसल सहायता योजना (रबी फसल) के तहत आवेदन दिये हैं. राई/सरसों और मसूर फसल के लिये आवेदन की तिथि पहले ही समाप्त हो चुकी है. मक्का व गेहूं के फसल के आवेदन की भी तिथि दो दिन बाद समाप्त हो जाएगी.
गेहूं व मक्का फसल लगाने वाले किसानों के 26 फरवरी समय सीमा निर्धारित है. अब मात्र दो दिन ही समय बचे हैं. जबकि करीब एक लाख किसान अब तक आवेदन जमा नहीं कर पाए हैं. वहीं जानकार बताते हैं कि ऐसे में इस योजना से नहीं जुड़ पाने वाले किसान प्राकृतिक आपदा या फिर फसल नुकसान की स्थिति सरकारी आर्थिक सहायता से वंचित रह जाएंगे.
फसलों को सुरक्षा प्रदान करती है यह योजना
जानकार तो मुख्यमंत्री फसल सहायता योजना को फसल बीमा के समान मानते हैं. वो इसलिए क्योंकि फसल नुकसान होने की स्थिति में इस योजना के तहत किसानों को राज्य सरकार आर्थिक सहायता मुहैया कराती है. प्राकृतिक आपदा की स्थिति में अगर किसानों के फसल/उत्पादन प्रभावित होते हैं तो उन्हें दो एकड़ जमीन के लिये सहायता राशि दी जाएगी.
20 प्रतिशत से कम फसल नुकसान होने पर प्रति एकड़ 75 सौ रुपये तथा दो एकड़ के लिये 15 हजार रुपये किसानों को मिलेंगे. इसी तरह 20 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर प्रति एकड़ 10 हजार रुपये तथा दो एकड़ के लिये 20 हजार रुपये आर्थिक सहायता किसानों को दिये जाते. उल्लेखनीय है कि फसलों को सुरक्षा प्रदान करने वाले इस योजना की शुरू से ही अनदेखी हो रही है. किसानों में जहां जागरूकता की कमी है. वहीं विभागीय अधिकारियों ने भी अब तक किसानों को जागरूक करने के कोई विशेष प्रयास नहीं किये हैं. यहां बता दें कि रबी मौसम के लिये गेहूं, मक्का, राई-सरसों तथा मसूर फसल को इस योजना के लिये अधिसूचित किया गया है.
आंकड़े के मुताबिक 80 हजार हेक्टेयर से जमीन पर इन फसलों की बुआई इस साल हुई है. लेकिन अधिकांश किसान इस योजना से जुड़ नहीं पाए हैं. जो उनके लिये नुकसानदेय भी साबित हो सकती है. जिले की फिलहाल स्थिति यह है कि गेहूं फसल के लिये 23 फरवरी तक 2303, मक्के के लिये 1914 किसानों ने ऑन लाईन रजिस्ट्रेशन कराए हैं. वहीं सरसों के लिये 282 तथा मसूर के लिये 71 किसानों ने इस योजना के तहत आवेदन दिये हैं.
सरसों व मसूर फसल के लिये आवेदन की तिथि समाप्त हो गई है. गेहूं व मक्का का फसल लगाने वाले किसान 26 फरवरी तक आवेदन दे सकेंगे. जिन किसानों ने अब तक ऑन-लाईन आवेदन नहीं दिया है. वो अविलम्ब आवश्यक कागजातों के साथ आवेदन जमा करा दें.
बीरेन्द्र शर्मा, जिला सहकारिता पदाधिकारी.
2017-18 में हुए प्राकृतिक आपदा के नुकसान से परेशान रहे किसान
जिले के किसान कभी बाढ़ तो सुखाड़ तो कभी मक्के में दाने नहीं आने सहित अन्य प्रकार की विपत्तियां से त्रस्त रहें हैं. जिससे इन्हें प्रायः नुकसान होता रहा है. अगर पिछले साल यानी वर्ष 2017-18 के रबी फसल की बात की जाए तो उस दौरान प्राकृतिक आपदा ने किसानों की कमड़ तोड़ दी थी. 50 हजार एकड़ से अधिक जमीन पर लगे मक्के व गेहूं की फसल प्रभावित हुए थे. वहीं रबी ही नहीं साल 2018 का खरीफ फसल भी किसानों के लिये अच्छा नहीं रहा. खरीफ मौसम में अपेक्षा से कम हुई बारिश ने जिले के किसानों की उम्मीद पर ही पानी फेर दिया.
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