महिलाएं आज मनायेंगी तीज पर्व, देर शाम तक बाजार में पूजन सामग्री की होती रही खरीददारी

Updated at : 25 Aug 2025 7:46 PM (IST)
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महिलाएं आज मनायेंगी तीज पर्व, देर शाम तक बाजार में पूजन सामग्री की होती रही खरीददारी

महिलाएं आज मनायेंगी तीज पर्व, देर शाम तक बाजार में पूजन सामग्री की होती रही खरीददारी

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कटिहार पति की लंबी आयु को लेकर सुहागिन मंगलवार को तीज पर्व करेगी. सोमवार की देर शाम तक खरीदारी को लेकर बाजार में महिलाओं की भारी भीड़ रही. पर्व को लेकर महिलाएं फल दुकान पूजा दुकान में देर रात तक पूजा सामग्री की खरीदारी करने में लगी हुई थी. भादों माह की शुक्ल पक्ष तृतीया को तीज पर्व मनाया जाता है. हिंदू धर्म में तीज पर्व का बड़ा ही महत्व माना जाता है. इस पर्व में माता गौरी, भगवान शंकर की पूजा आराधना कर सुहागिन अपने पति की लंबी आयु की कामना करती है. साथ ही कुंवारी कन्या भी मनचाहे वर के लिए भी इस पर्व को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाती हैं. हिंदू धर्म में इस पर्व को बड़ा ही कठिन माना जाता है. पूजा करने वाले महिला व लड़की निर्जला उपवास रखती है. कहा जाता है कि मां गौरी भगवान शंकर इस व्रत को करने वाले पर अपनी असीम कृपा बनाए रखते हैं. सदियों से चली आ रही इस पर्व का अपना ही इतिहास है. कहा जाता है कि इस दिन माता पार्वती के कई साल की तपस्या के बाद भगवान शिव ने उन्हें आज के ही दिन अपनाया था. शिव मंदिर के पुजारी बबलू पाठक ने कहा कि हर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए सोलह सिंगार करके शिव पार्वती की पूजा करती है. जिससे उनका सौभाग्य बढ़ता है. उनके पति की लंबी आयु बढ़ती है. इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी से मूर्ति बनाकर या बाजार से लाकर उनकी पूजा करती है. इस व्रत में सुहाग की चीजें अर्पित की जाती है. भगवान शिव को वस्त्र आदि अर्पित किए जाते हैं. पूजा के बाद हरियाली तीज की कथा सुनने का भी विधान है. मान्यता है कि कथा जब भी सुने अपने पति का ही ध्यान लगाए रखें. कथा सुनने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें इसके बाद उनको फूल और अक्षर चढ़ाकर आरती कर भगवान की परिक्रमा करें और उनसे आशीर्वाद मांगे. मान्यता है कि इस पर्व को करने वाले रात भर सोते नहीं है. रात भर माता पार्वती की आराधना करते हैं. अगले दिन माता पार्वती को सिंदूर अर्पित कर भगवान को भोग लगाने के बाद नदी या तालाब में मूर्तियों को प्रवाहित करते हैं. सुहाग और श्रृंगार का सामान किसी सुहागन को दान करने की मान्यता है. यह पर्व उत्तर भारत में बड़ी संख्या में सुहागिन मनाती है.

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