लाभकारी सिद्ध हो रहा बालू रेत पर लगने वाली तरबूज की खेती
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 12 May 2024 7:34 PM
लाभकारी सिद्ध हो रहा बालू रेत पर लगने वाली तरबूज की खेती
कुरसेला. नदियों के क्षारण बालू रेत पर नगदी फसल के रूप में तरबूज की खेती किसानों को लिए वरदान साबित हो रहा है. दियारा क्षेत्र के भूभाग पर उपयुक्त भूमि जलवायु होने से किसान इस खेती को अपना रहे हैं. बालू रेत पर विपरित हालातों में कड़ी मेहनत सिंचाई खाद का प्रयोग कर किसान खेती को फलित कर लाभ उठाने का कार्य करते हैं. तकरीबन तीन माह की खेती में मौसमी फल तरबूज बिक्री के लिये तैयार हो जाता है. कृषकों से मिली जानकारी के अनुसार खेती पर प्रति एकड़ तीस हजार के लागत खर्च पर लगभग 60 हजार या उससे अधिक का लाभ मिलता है. किसानों को खेतों में फल के तैयार होने पर बाजार तक लाने में बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है. नाव पर फलों को लेकर नदियों को पार करना पड़ता है. उसके बाद ट्रैक्टरों पर लाद कर बाजार तक बिक्री के लिये लाना पड़ता है. इस बीच किसानों को आर्थिक मानसिक रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ता है. किसानों से मिली जानकारी के अनुसार तरबूज का फल थोक रूप से पांच से लेकर बीस रुपये प्रति किलो के दर से बिक्री होता है. स्थानीय स्तर पर फल का सीमित बाजार होता है. बाजार में फल के अधिक आवक होने से व्यापारियों किसानों द्वारा इसे नेपाल से लेकर देश-प्रदेश के शहरों तक बिक्री के लिये भेजा जाता है. बताया जाता है कि फल के तैयार होकर पकने के बाद प्रतिदिन 25 से 50 ट्रैक्टर तरबूज कुरसेला बाजार में बिक्री के लिये आता है. बाजार मांग से कई गुणा अधिक फलों के आने पर इसे कुरसेला से बाहर ट्रकों, पिकअप मालवाहक से बिक्री के लिये भेजा जाता है. जिम्मी रोड लाइन के ट्रांसपोर्टर सज्जाद अली ने बताया कि प्रतिदिन पांच से दस ट्रक तरबूज बिक्री के लिये नेपाल, कोलकाता, धुलांग, बरगछिया, पानागढ़, आसनसोल, उड़ीसा, झारखंड के रांची, छत्तीसगढ़, रायपुर, राजस्थान आदि जगहों पर ट्रकों से मंडी में बिक्री के लिये भेजा जाता है. इसी तरह प्रतिदिन छोटे पिकअप मालवाहक वाहन से गया, छपरा, बलिया, खगड़िया, बेगुसराय, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, अररिया बिक्री के लिये भेजा जाता है. तरबूज फल का एक माह के करीब तक बाजार में आवक बना रहता है. बताया गया कि अगामी एक पखवाड़े के करीब तक बाजारों में इस फल का आवक बना रहेगा.
गंगा, कोसी के क्षारण दियारा क्षेत्रों में होती है खेती
नदियों के क्षारण बालू रेत के साथ दियारा के बलधुसर भूमि पर तरबूज सहित ककड़ी, बतिया, खीरा आदि मौसमी फलों के सैकड़ों एकड़ क्षेत्र के भुभाग पर मौसमी फलों की खेती की जाती है. जानकारी अनुसार जनवरी माह में किसान बीजा रोपन कर तरबूज के पौधे लगाते हैं. पिछात में कुछ किसान फरबरी माह में इसका पौधा लगाते हैं. मार्च से अप्रैल माह तक इसका फल तैयार हो जाता है. करीब ढाई से तीन महीने में खेती का फल बिक्री के लिये तैयार हो जाता है.
गर्मियों में तरबूज सुपरफूड
तरबूज का फल गर्मियों में राहत दायक सुपरफूड माना जाता है. जानकारी के अनुसार इस फल में 92 प्रतिशत पानी होता है. प्यास, भूख को राहत देने के स्वाद में मीठा होता है. अन्य मौसमी फलों के तरह इस फल की अलग महत्ता और मांग होती है. गर्मी के मौसम में इस फल को लोग बड़े चाव से खाते हैं. कोल्ड ड्रिंक से इस फल का प्रयोग स्वास्थ्य के दृष्टी से बेहतर होता है.
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