रमजानुल मुबारक का दूसरे जुमा की नमाज अकीदत के साथ रोजेदारों ने पढ़ी

रमजानुल मुबारक का दूसरे जुमा की नमाज अकीदत के साथ रोजेदारों ने पढ़ी
फलका रमजानुल मुबारक के दूसरा जुमा रोजेदारों ने अकीदत के साथ प्रखंड के विभिन मस्जिदों में नमाज अदा की. देश और समूचे दुनिया में अमन व शांति के लिए दुआ की. दूसरे जुमा में प्रखंड के सभी मस्जिदें खचाखच भरी थी. नहरी मस्जिद के इमाम मौलाना जाहिद हुसैन ने कहा के रमजान का महीना जिसे हदीसे पाक में अल्लाह का महीना कहा गया है. वह सारे भाई खुशनसीब हैं. रमजान का महीना पाया और नेकियों से अपने दामन को भरकर अपने रब को राजी कर लिया. रमजान का महीना रहमत ए इलाही के उतरने का महीना है. यह वह महीना है जिसमें तौरात इंजील जबूर और दूसरी आसमानी किताबें नाज़िल हुई है. सबसे बढ़कर इस पाक पवित्र महीने में अल्लाह का कलाम कुरान ए करीम इसी महीने में उतरा है. मौलाना ने बताया कि जब रमजान की पहली रात होती है तो आसमान के दरवाजे खोल दिए जाते हैं. यह दरवाजे रमजान की आखरी रात तक खुली रहती है. कोई ईमानदार बंदा ऐसा नहीं जो इन रातों में से किसी रात में नमाज पढ़ें मगर अल्लाह ताला हर सजदे के बदले डेढ़ हजार नेकियां लिखता है. लिए जन्नत में एक घर सुर्ख याकूत से बनाया जाता है. जिसके 60000 दरवाजे होंगे. हर दरवाजे के मुतालिक एक सोने का महल होगा जो लाल मोती से बनाया होगा. रमजान के पहले दिन का जो रोजा रखता है तो उसके तमाम गुनाह माफ कर दिए जाते हैं. हर रोज सुबह की नमाज से लेकर सूरज डूबने तक 70,000 फरिश्ते उसके लिए दुआएं मगफरत करते हैं.
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