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क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर केबी झा कॉलेज प्राचार्य ने निकाली बहाली की निविदा

पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट के तहत पदाधिकारी से वसूली का है प्रावधान, शिक्षकों के बीच हास्यास्पद

सरोज कुमार, कटिहार. केबी झा कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ हरेंद्र कुमार सिंह क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की नियुक्त को लेकर निविदा निकालना राज्य सरकार व कुलपति के निर्देशों को ठेंगा दिखाने के साथ शिक्षकों के बीच हास्यास्पद का विषय बन गया है. ऐसा इसलिए कि बिहार सरकार शिक्षा विभाग द्वारा विभागीय निविदा संख्या बीएसएचईसी-टेंडर्स-53-2023-301, 25 अगस्त 2023 को बिहार राज्य के विवि एवं महाविद्यालयों के लिए हाऊसकीपिंग की सेवा उपलब्ध कराने के लिए एजेंसी चयन से संबंधित निविदा पहले ही प्रकाशित की गयी थी. इसके तहत सरकार द्वारा 100 एजेंसियों को हायर भी किया गया है. इतना ही नहीं उच्च शिक्षा निदेशक पटना डॉ रेखा कुमारी ने केबी झा कॉलेज सहित सभी अंगीभूत महाविद्यालयों में दो बार जाकर सरकार के विभागीय निविदा सहित निर्देशों से न केवल अवगत कराया है, बल्कि प्राचार्यों को निविदा से संबंधित तीन सेट में संबंधित दिशा निर्देश की कॉपी एवं हायर एक सौ एजेंसियों की सूची भी दी गयी थी. जिसे चयन कर उन एजेंसी से कॉलेज में कर्मियों की पूर्ति के लिए केवल डिमांड भेजे जाने की बात बतायी गयी थी. उच्च शिक्षा निदेशक पटना डॉ रेखा कुमारी ने केबी झा कॉलेज में पहली बार एक दिसम्बर 2023 और दूसरी बार 23 फरवरी 2024 को आकर प्राचार्य कक्ष में प्राचार्य समेत अन्य शिक्षकों को बताया था कि महाविद्यालयों में कर्मचारियों की कमी काे पूरा करने के लिए बिहार सरकार शिक्षा विभाग द्वारा 100 एजेंसियों को हायर किया है. कॉलेजों में अब मानव बल की पूर्ति एजेंसी के माध्यम से की जायेगी. इसके साथ ही कर्मचारियों के कार्य व मानदेय को लेकर निर्देशों से भी बारीकि से अवगत कराया गया. बावजूद केबी झा कॉलेज प्राचार्य ने कर्मियों की संविदा पर नियुक्ति को लेकर 15 जून 2024 को निविदा निकाल दिया. जिसमें 02 दो दिवा रात्रि प्रहरी, 01 सफाई कमी, 01 डाटा इंट्री ऑपरेटर एवं 01 जूनियर बुक कीपर के लिए अभ्यर्थियों से ऑफलाइन व केबी झा कॉलेज के मेल व बेवसाइट पर आवेदन मांगा गया. शिक्षाविदों का कहना है कि उच्च शिक्षा निदेशक डॉ रेखा कुमारी के कॉलेज मेंं दो बार विजिट के बाद भी आखिर क्याें व किस फंड की राशि से निविदा निकाला गया यह जांच का विषय है. इस तरह के निर्णय से महाविद्यालय कोष का अपव्यय करना वित्तीय अनियमितता को दर्शाता है.

बजटीय प्रावधान पर संचालित होता है विवि व महाविद्यालय

शिक्षकों का कहना है कि विवि अधिनियम 1976 की कंडिका 50 में स्पष्ट वर्णित है कि बजट के बाहर महाविद्यालय व विश्व विद्यालय को किसी प्रकार का खर्च नहीं करना है. विवि अधिनियम 1976 के कंडिका 35 में स्पष्ट उल्लेख है कि किसी प्रकार का महाविद्यालय फंड का अपव्यय या बेफिजुल खर्च व भुगतान करने पर पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट के तहत पदाधिकारी से वसूली का प्रावधान है. पूर्णिया विवि कुलपति डॉ राजनाथ यादव को ऐसे प्रभारी प्राचार्य जिन्हें विवि अधिनियमों की जानकारी नहीं रहने व जब तब कॉलेज फंड की राशि खर्च करने वाले के विरुद्ध कार्रवाई करने की जरूरत है, जिससे कि यह मिशाल बन सके. साथ ही अन्य महाविद्यालयों के प्राचार्य व प्रभारी प्राचार्य द्वारा मनमाने ढंग से कोष का अपव्यय करते हैं. उस पर अंकुश लग सके. नियम को ताक पर रखकर अन्य महाविद्यालय में भी अपने अनुरूप क्रय किया जा रहा है. इस पर भी विराम लग सकें.

कर्मियों की कमी के कारण कॉलेज संचालन में हो रही है परेशानी

उच्च शिक्षा निदेशक डॉ रेखा कुमारी ने एक सौ एजेंसी से संबंधित सूची दी गयी है. सूची में शामिल तीन से चार एजेंसी को फोन करने के बाद जवाब नहीं दिया गया. विवि प्रशासन को बार-बार पत्र भेजा गया. आज तक कोई जवाब नहीं मिला. उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा एजेंसियों से संबंधित दिये गये निर्देश के आखिरी पन्ने पर छोटे अक्षर में बताया गया है कि सौंपी गयी एजेंसी से बात नहीं बनने पर स्थानीय स्तर पर निविदा निकालकर आउटसोर्सिंग से कर्मी रख सकते हैं. ऐसा कॉलेज के अर्थपाल द्वारा भी पढ़ कर बताया गया. जिसके बाद सभी की सहमति से निविदा निकाली गयी.

डॉ हरेन्द्र कुमार सिंह, प्रभारी प्राचार्य, केबी झा कॉलेज,

सरकार के निविदा के बाद कॉलेज की ओर से निविदा निकालना मूर्खता

राज्य के विवि व महाविद्यालयों के लिए हाऊसकीपिंग की सेवा उपलब्ध कराने के लिए एजेंसी चयन से संबंधित विभागीय निविदा पूर्व में ही प्रकाशित की गयी थी,जिसके आलोक में 100 एजेंसी को चयन कर मानव बल उपलब्ध कराने का आदेश है. केबी झा कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य द्वारा संविदा पर बहाली के लिए निविदा निकालना मूर्खतापूर्ण निर्णय है. सरकार द्वारा निकाली गयी निविदा के बाद किसी हाल में न तो विवि स्तर से निविदा निकाली जा सकती है और न हीं कॉलेज स्तर से, अगर केबी झा कॉलेज प्राचार्य की ओर से नियम के विरुद्ध कार्य किया गया है, तो उन्हें जवाब देना होगा. किस फंड से निविदा निकाली गयी है. कितने खर्च किया गया है. इस सब की जानकारी लेंगे. विवि अधिनियम 1976 की धारा 35 के तहत व्यय की गयी राशि पदाधिकारी से वसूली करने का प्रावधान है.

डॉ आरएन यादव, कुलपति, पीयू

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