बारसोई की नदियों पर जिंदगी दांव पर, नाव बनी सहारा

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बारसोई की नदियों पर जिंदगी दांव पर, नाव बनी सहारा

बारसोई की नदियों पर जिंदगी दांव पर, नाव बनी सहारा

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– पुल नहीं बनने से ग्रामीणों में आक्रोश – महानंदा, कुलिक व नागर नदी में बढ़े जलस्तर के बीच जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर लोग – बिहार- पश्चिम बंगाल सरकार से पुल निर्माण की उठी मांग बारसोई लगातार हो रही बारिश के कारण बारसोई प्रखंड अंतर्गत बहने वाली महानंदा, कुलिक एवं नागर नदियों में जलस्तर बढ़ जाने से क्षेत्र के हजारों लोगों की परेशानी बढ़ गई है. वर्षों से बांस के सहारे बने चचरी पुल के बह जाने के बाद अब नाव ही लोगों के आवागमन का एकमात्र सहारा बची है. लेकिन नावों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर बिहार से पश्चिम बंगाल के रायगंज तक यात्रा करने को मजबूर हैं. बारीओल घाट एवं तारापुर घाट पर शुक्रवार को ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर बिहार एवं पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई. ग्रामीणों का कहना था कि हर वर्ष बरसात आते ही यही भयावह स्थिति उत्पन्न हो जाती है, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया. लोगों ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं. लेकिन बरसात शुरू होते ही जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है. प्रदर्शन के दौरान जिला परिषद सदस्य गुलजार आलम ने कहा कि बारीओल घाट एवं तारापुर घाट पर वर्षों से पुल निर्माण की मांग की जा रही है. यह रास्ता बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है. प्रतिदिन सैकड़ों लोग रोजगार, इलाज, शिक्षा एवं बाजार के लिए रायगंज आते-जाते हैं. लेकिन पुल नहीं होने से लोगों को अपनी जान हथेली पर रखकर नदी पार करनी पड़ती है. उन्होंने बिहार सरकार, बंगाल सरकार, कटिहार व रायगंज के सांसदों से अविलंब पुल निर्माण की दिशा में ठोस पहल करने की मांग की. ग्रामीणों ने बताया कि नावों की संख्या बेहद कम है. जिसके कारण एक नाव पर क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाता है. कई बार छोटे बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों को घंटों नदी किनारे इंतजार करना पड़ता है. लोगों का कहना है कि यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त नाव उपलब्ध कराने, सुरक्षा जैकेट की व्यवस्था करने तथा स्थायी समाधान के रूप में पुल निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जायेगा. प्रदर्शन में मुख्य रूप से डॉ. सफीकुल, रहीम, जाहिद, टिंकू, इब्राहिम, राजू, जाबिर, नूर आलम, इफ्तेखार, सरफुल, जौहरुल, आसिफ, रोप, मंगलू, अजगर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.

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राजकिशोर

लेखक के बारे में

By राजकिशोर

राजकिशोर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के कटिहार कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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