गेड़ाबाड़ी में फल फूल रहा है अवैध नर्सिंग होम का धंधा

Published at :30 Jul 2024 10:30 PM (IST)
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से नर्सिंग होम में मरीजों का किया जाता है आर्थिक शोषण

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कोढ़ा. कोढ़ा प्रखंड क्षेत्र के गेड़ाबाड़ी बाजार समेत कोलासी बाजार में अवैध क्लिनिक, अल्ट्रासाउंड सेंटर, पैथोलॉजी सेंटर एवं कई नर्सिंग होम संचालित हैं. गेड़ाबाड़ी बाजार के समीप स्थित कई ऐसे नर्सिंग होम एवं क्लीनिक, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी सेंटर अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं. जहां गरीब, निःसहाय एवं निर्धन मरीजों का आर्थिक दोहन किया जा रहा है. सूत्रों पर यकीन करें तो कोढ़ा प्रखंड क्षेत्र के कई ऐसे नर्सिंग होम हैं. जिनका प्रखंड क्षेत्र के सभी आशा कार्यकर्ताओं से सांठ गाठ है. सरकारी आशा कार्यकर्ता ऐसे नर्सिंग होम में गर्भवती महिलाओं को प्रसव कराने के लिए लाते हैं. नॉर्मल डिलीवरी होने पर आशा कार्यकर्ताओं को निजी अस्पताल के द्वारा दो हजार एवं सीजर होने पर चार से पांच हजार रूपये एक मरीज पर दिया जाता है. जिस कारण लोभ में आकर आशा कार्यकर्ता निजी नर्सिंग होम में गर्भवती महिलाओं को लाया जाता है. अब सवाल यह उठता है कि इस और स्वास्थ्य विभाग ध्यान क्यों नहीं दे रहे है. इतना ही नहीं अगर कोई गर्भवती महिला को प्रसव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में होता है तो उन्हें स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सारी दवाई व अन्य सुविधा अस्पताल से ही मुहैया करायी जाती है. पर आशा कार्यकर्ता कमीशन के लालच में मरीज को एएनएम के द्वारा लिखी गयी पर्ची पर सारी दवाई बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीद कर दिया जाता है. सूत्र बताते हैं कि यहां भी दवाई खरीदारी पर 20 से 25% कमीशन आशा कार्यकर्ता को दिया जाता है. सूत्रों पर अगर यकीन करें तो गेड़ाबाड़ी बाजार में कई ऐसे अल्ट्रासाउंड केंद्र एवं एक्स रे केंद्र तथा पैथोलॉजी और निजी नर्सिंग होम हैं. जिनका स्वास्थ्य विभाग से लाइसेंस निर्गत नहीं है. यहां कई ऐसे अल्ट्रासाउंड सेंटर, एक्सरे सेंटर, पैथोलॉजी सेंटर एवं नर्सिंग होम अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं. जिस कारण यहां अवैध नर्सिंग होम एवं अवैध पैथोलॉजी सेंटर का धंधा फल फूल रहा है. अगर स्वास्थ्य विभाग अवैध नर्सिंग होम व एक्स रे सेंटर, पैथोलॉजी सेंटर, अल्ट्रासाउंड सेंटर पर बीच-बीच में कार्रवाई करें तो यहां से अवैध नर्सिंग होम व अन्य का नामों निशान मिट जायेगा.

कहते हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी

मामले में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अमित आर्य ने बताया कि आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को प्रसव कराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र ही लेकर आती है. अगर किसी आशा द्वारा किसी निजी अस्पताल में ले जाया जाता है, तो चिह्नित कर विभागीय कार्रवाई की जायेगी.

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